कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नए निवेश और उद्योगों के विस्तार के रास्ते में लंबे समय से रोड़ा बने 'सिंडिकेट राज' और रंगदारी (तोलाबाजी) के खिलाफ नई राज्य सरकार ने एक अभूतपूर्व और बेहद कड़ा कदम उठाया है। सोमवार को विधानसभा में नई सरकार का पहला बजट (West Bengal Budget 2026) पेश करते हुए राज्य के वित्त मंत्री डॉ. स्वपन दासगुप्ता ने स्पष्ट कर दिया कि कानून के दायरे में रहकर व्यापार करने वाली कंपनियों को 'सिंडिकेट-चार्ज' या किसी भी तरह की अवैध वसूली से बचाने के लिए सरकार जल्द ही एक विशिष्ट कानून लागू करने जा रही है।
सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले का उद्योग जगत (Industrial Sector) ने खुलकर स्वागत किया है। उद्योगपतियों का कहना है कि राज्य में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of Doing Business) यानी व्यापार करने की सुगमता को बेहतर बनाने के लिए ऐसा कड़ा प्रशासनिक कदम उठाना बेहद जरूरी था।
क्या है सिंडिकेट राज की समस्या?
आमतौर पर बड़े उद्योगपति खुले मंचों से रंगदारी या सिंडिकेट के दबाव पर बोलने से बचते हैं, लेकिन अंदरूनी तौर पर यह समस्या कितनी गहरी है, इसका अंदाजा तब लगता है जब कोई बड़ा निवेश अटक जाता है या कोई कारखाना बंद हो जाता है।
अवैध वित्तीय दबाव: निवेशकों को कानूनी सरकारी फीस देने के अलावा अक्सर स्थानीय या राजनीतिक प्रभाव वाले तत्वों को अवैध रूप से पैसे देने पड़ते हैं।
महंगा निर्माण मटीरियल: कई मामलों में कंपनियों पर दबाव बनाया जाता है कि वे किसी खास व्यक्ति या सिंडिकेट से ही ऊंचे दामों पर निर्माण सामग्री (कच्चा माल) खरीदें।
हल्दिया विवाद: हाल के दिनों में हल्दिया बंदरगाह और समग्र हल्दिया औद्योगिक क्षेत्र में इस तरह की जबरन वसूली की कई शिकायतें सुर्खियों में आई थीं, जिससे राज्य की छवि प्रभावित हुई थी।
कानून का शासन होगा स्थापित: वित्त मंत्री का कड़ा संदेश
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री डॉ. स्वपन दासगुप्ता ने भरोसा दिलाया कि इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य रंगदारी या सिंडिकेट से जुड़ी शिकायतों का बेहद तेजी से निपटारा करना होगा। इसके साथ ही, जबरन वसूली में शामिल दोषियों के खिलाफ व्यक्तिगत तौर पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि इस कदम से राज्य में कानून का शासन और मजबूत होगा, जिससे बड़े पैमाने पर घरेलू और विदेशी पूंजी निवेश (FDI) आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
बंगाल के उद्योग जगत ने फैसले को सराहा
पश्चिम बंगाल के विभिन्न उद्योग मंडलों (Chambers of Commerce) ने सरकार के इस साहसी फैसले की सराहना की है:
भारत चैंबर के पूर्व अध्यक्ष एन. जी. खेतान ने कहा, "राज्य सरकार द्वारा एक नई और स्पष्ट औद्योगिक नीति की घोषणा करना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि लंबे समय से इसकी कमी थी। निवेश के शुरुआती चरण में ही निवेशकों को ऐसी अवैध मांगों का सामना करना पड़ता था, जिससे औद्योगिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ रहा था।"
बंगाल चैंबर की वित्तीय मामलों की समिति के अध्यक्ष विवेक जालान ने कहा, "औद्योगिक क्षेत्रों को बाहरी भ्रष्टाचार से बचाना और उन्हें कानूनी सुरक्षा देना बेहद जरूरी है।"
'लघु उद्योग भारती' के अध्यक्ष के. के. सेकसरिया ने भी इस सुधारवादी कदम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि सरकार इस कानून को जल्द से जल्द समय सीमा के भीतर लागू करेगी ताकि पश्चिम बंगाल देश का सबसे उद्योग-अनुकूल राज्य बन सके।