पश्चिम बंगाल: की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उप-चुनाव को लेकर राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच खींचतान चरम पर पहुंच गई है। सोमवार शाम ऋतव्रत बनर्जी समर्थित तृणमूल धड़े ने दोनों सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा की। ऋतव्रत खेमे ने नंदीग्राम सीट से मोहम्मद समिउल हक और रेजीनगर सीट से सफियुज्जमान शेख को उम्मीदवार बनाया है। इससे पहले कालीघाट (ममता बनर्जी) धड़े ने भी इन्हीं दो सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी। दोनों खेमों द्वारा अलग-अलग प्रत्याशी उतारे जाने के बाद अब तृणमूल के अपने ही वोट बैंक में विभाजन की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
ऋतव्रत खेमे की घोषणा: नंदीग्राम से समिउल और रेजीनगर से सफियुज्जमान
प्रतीक विवाद के बीच ऋतव्रत बनर्जी नीत तृणमूल धड़े ने सोमवार शाम नंदीग्राम और रेजीनगर के चुनावी मैदान में अपने प्रत्याशियों के नाम सामने रखे। ऋतव्रत खेमे ने नंदीग्राम सीट पर मोहम्मद समिउल हक को टिकट दिया है, जबकि रेजीनगर सीट से सफियुज्जमान शेख को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस घोषणा के साथ ही उप-चुनाव के दौरान दोनों तृणमूल गुटों के बीच प्रत्यक्ष चुनावी मुकाबले का रास्ता साफ हो गया है।
कालीघाट धड़े ने संचिता प्रधान और रबीउल आलम पर लगाया दांव
ऋतव्रत खेमे की घोषणा से ठीक पहले कालीघाट स्थित तृणमूल नेतृत्व ने भी दोनों सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया था। कालीघाट धड़े की ओर से नंदीग्राम सीट पर संचिता प्रधान (दे) को उम्मीदवार घोषित किया गया है, जबकि रेजीनगर सीट से रबीउल आलम चौधरी चुनावी मैदान में होंगे।
ममता बनर्जी के चुनाव न लड़ने पर ऋतव्रत खेमे का तीखा हमला
उप-चुनावों की घोषणा के बाद से ही यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि नंदीग्राम से स्वयं ममता बनर्जी मैदान में उतर सकती हैं। ऋतव्रत खेमे ने पहले ही स्पष्ट किया था कि यदि ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं, तो वे अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारेंगे। हालांकि, जब कालीघाट धड़े ने संचिता प्रधान के नाम का ऐलान किया, तो ऋतव्रत खेमे ने निशाना साधते हुए कहा कि कालीघाट नेतृत्व चुनावी मैदान में उतरने का साहस नहीं दिखा सका, जिसके बाद उन्हें अपने उम्मीदवार उतारने पड़े।
पार्टी के फंड और प्रतीक चिन्ह 'जोड़ा फूल' पर जारी है कानूनी लड़ाई
दोनों धड़ों का यह चुनावी टकराव ऐसे समय में हो रहा है जब तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक बैंक खातों और करोड़ों रुपये के फंड पर कब्जे को लेकर अदालत में मामला लंबित है। इसके अलावा, पार्टी के आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न 'जोड़ा फूल' (घास-फूल) पर अपना-अपना दावा पेश करने के लिए दोनों ही पक्ष निर्वाचन आयोग के समक्ष अपने दस्तावेज और बयान जमा करा चुके हैं।
तृणमूल बनाम बीजेपी से ज्यादा 'दो तृणमूलों' के बीच खींचतान की चर्चा
उप-चुनाव की तिथियों के ऐलान के बाद से ही राजनीतिक हलकों में इस बात पर बहस तेज हो गई है कि तृणमूल का कैडर और पारंपरिक वोट बैंक किस ओर जाएगा। जानकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन उप-चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खिलाफ मुख्य लड़ाई से भी ज्यादा तीखा संघर्ष दोनों तृणमूल धड़ों के बीच देखने को मिलेगा।