कोलकाता - पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार किसी भी अवैध विदेशी नागरिक को राज्य में रहने की अनुमति नहीं देगी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने गैरकानूनी तरीके से सीमा पार कर राज्य में प्रवेश किया है, उनकी पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अवैध घुसपैठियों की होगी पहचान
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ सत्यापन अभियान चलाएगा और प्रत्येक संदिग्ध मामले की जांच की जाएगी। उनका कहना था कि किसी भी कार्रवाई में जल्दबाजी नहीं होगी, बल्कि सभी तथ्यों की जांच के बाद ही निर्णय लिया जाएगा ताकि किसी निर्दोष नागरिक को परेशानी का सामना न करना पड़े।
"घुसपैठिए और शरणार्थी अलग-अलग"
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि अवैध घुसपैठियों और शरणार्थियों के बीच स्पष्ट अंतर है। उनके अनुसार, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) में जिन धार्मिक समुदायों—हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी—का उल्लेख है, उन्हें कानून के तहत शरणार्थी माना जाता है, जबकि अवैध तरीके से प्रवेश करने वाले अन्य लोगों को घुसपैठिए की श्रेणी में रखा जाएगा।
पिछली गलतियों से सबक लेने की बात
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार इस पूरे अभियान को बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ाएगी। उन्होंने दावा किया कि पूर्व में हुई कुछ प्रशासनिक त्रुटियों से सबक लिया गया है और इस बार किसी भी भारतीय नागरिक के साथ गलत कार्रवाई न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।
सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर जोर
उन्होंने कहा कि राज्य की सुरक्षा, कानून व्यवस्था और वैध नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से सीमा क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और संदिग्ध मामलों की गहन जांच करने के निर्देश संबंधित एजेंसियों को दिए गए हैं।
राजनीतिक और कानूनी बहस तेज
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद अवैध घुसपैठ और नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस फिर तेज होने की संभावना है। एक ओर सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़ा विषय बता रही है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर अपनी अलग राय रख सकता है। आने वाले दिनों में राज्य में इस विषय पर प्रशासनिक गतिविधियां और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं दोनों तेज होने की उम्मीद है।