नई दिल्ली - देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाले पेपर लीक पर सख्ती बढ़ाते हुए राष्ट्रपति ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही परीक्षा में गड़बड़ी और प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मामलों में पहले से अधिक कड़े कानूनी प्रावधान लागू हो जाएंगे।
तीन महीने में होगा मामलों का निपटारा
नए कानून के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई तेजी से पूरी करने का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके और जांच प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना
संशोधित कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति पेपर लीक या परीक्षा में संगठित गड़बड़ी का दोषी पाया जाता है, तो उसे अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा दोषियों पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य ऐसे अपराधों में शामिल पूरे नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई करना है।
परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने पर जोर
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यह कानून केवल पेपर लीक की घटनाओं पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे संगठित नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार नए प्रावधानों से परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और निष्पक्ष बनेगी।
लोकसभा से हंगामे के बीच हुआ था पारित
यह संशोधन विधेयक लोकसभा में व्यापक चर्चा और हंगामे के बाद पारित हुआ था। विधेयक के पारित होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा था कि नए कानून में कड़ी सजा, त्वरित न्यायालय, बेहतर जांच व्यवस्था और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि नए कानून से प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, युवाओं का भरोसा मजबूत होगा और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। साथ ही संगठित तरीके से परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़ करने वाले गिरोहों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा।