कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नई सरकार में मंत्रियों ने कार्यभार संभालते ही पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए कथित घोटालों पर सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी है। राज्य के नवनियुक्त खाद्य एवं सहकारिता मंत्री अशोक कीर्तनीया ने सहकारिता विभाग और सहकारी बैंकों (Cooperative Banks) में फैले भ्रष्टाचार की जांच के लिए व्यापक स्तर पर नियमित ऑडिट (Audit) कराने का कड़ा निर्देश जारी किया है।कोलकाता के नव महाकरण (नया सचिवालय) में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में मंत्री ने बेबाक अंदाज में कहा कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ इस जंग में किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं, भले ही इसके लिए उनकी जान पर ही बन आए।
"करोड़ों कमाने वाले मुझे छोड़ेंगे नहीं, जान का खतरा है"
मंत्री अशोक कीर्तनीया ने बड़े घोटाले का पर्दाफाश करते हुए कहा:
"मैंने भ्रष्टाचार के एक बहुत बड़े मधुमक्खी के छत्ते में सीधे ढेला मार दिया है। जिन लोगों ने सालों से अवैध तरीके से करोड़ों-अरबों रुपये कमाए हैं, वे मुझे आसानी से नहीं छोड़ेंगे। इसलिए अब किसी भी क्षण मेरी जान जाने का खतरा (प्राणहानि की आशंका) बना हुआ है, लेकिन मैं डरने वाला नहीं हूँ।"
अब कोई जनप्रतिनिधि नहीं बनेगा सहकारिता बोर्ड का अध्यक्ष
सहकारिता क्षेत्र को राजनीतिक चंगुल से मुक्त कराने के लिए मंत्री ने एक ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव की घोषणा की। उन्होंने साफ किया कि अब से किसी भी कॉपरेटिव या सहकारिता संस्था के गठन के समय कोई भी राजनीतिक जनप्रतिनिधि (नेता या विधायक/सांसद) उसके शीर्ष पद पर नहीं बैठेगा। सहकारिता बोर्ड के चुने हुए सदस्य ही आपस में लोकतांत्रिक तरीके से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करेंगे।
अधिकारियों को सख्त चेतावनी: "लूटा हुआ पैसा लौटाओ, नहीं तो खैर नहीं"
अशोक कीर्तनीया ने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों के दौरान सहकारिता विभाग को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया और सहकारी बैंकों से न केवल पैसे लूटे गए, बल्कि बैंकों की संपत्तियों को भी पानी के मोल बेच दिया गया। किसानों को उनके हक का पैसा नहीं मिला और रसूखदारों ने लॉन्ग टर्म लोन (Long Term Loan) लेकर डकार लिया।
मंत्रालय के भ्रष्ट अधिकारियों को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए सहकारिता मंत्री ने कहा:
बनाई जा रही है लिस्ट: अधिकारियों को निर्देश दे दिया गया है कि 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक का लोन लेकर न चुकाने वाले डिफॉल्टर्स की लिस्ट तैयार करें। साथ ही भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों की भी सूची बनाई जा रही है।
खाद खरीद में भी घोटाला: खाद और उर्वरक (Fertilizer) की खरीद में भी भारी गड़बड़ी हुई है। ऑडिट के जरिए यह तय किया जाएगा कि कौन सा अधिकारी इसमें शामिल था और सरकार को कितना नुकसान हुआ। उस नुकसान की पाई-पाई वसूली जाएगी।
फील्ड वेरिफिकेशन के बाद ही लोन: अब लोन देने की पुरानी लचर व्यवस्था नहीं चलेगी। पूरी ग्राउंड रिपोर्ट और फील्ड वेरिफिकेशन के बाद ही लोन पास होगा। अगर कोई गड़बड़ी हुई, तो लोन पास करने वाले अधिकारी को जिम्मेदार मानकर सीधे पकड़ा जाएगा।
अमित शाह के समन्वय से बंगाल में आएंगी 16 केंद्रीय योजनाएं
अपनी विधानसभा उत्तर बनगांव में भी इस मुद्दे पर मुखर रहने वाले मंत्री ने कहा कि राज्य की नई 'डबल इंजन' सरकार भ्रष्टाचार के सवाल पर रत्ती भर भी समझौता या ढील नहीं बरती जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के साथ निरंतर समन्वय बनाकर वे किसानों की उन्नति के लिए काम करेंगे। केंद्र सरकार की सहकारिता से जुड़ी 16 महत्वपूर्ण केंद्रीय योजनाओं को जल्द ही एक-एक कर पश्चिम बंगाल में धरातल पर उतारा जाएगा ताकि गरीब किसानों को उनका सीधा लाभ मिल सके।