भारत निर्वाचन आयोग पश्चिम बंगाल में आगामी चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से कराने के लिए तैयारियों में जुट गया है। मतदाता सूची से लेकर मतदान और मतगणना तक की प्रक्रिया के लिए विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में चुनाव आयोग के प्रतिनिधियों ने चुनाव तैयारियों की जानकारी दी। बैठक में बताया गया कि इस बार राज्य में चुनाव पर्यवेक्षकों (ऑब्जर्वरों) की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही मतदान से पहले मतदाताओं के लिए एक सप्लीमेंटरी वोटर लिस्ट जारी करने की योजना पर भी काम चल रहा है। बैठक में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल और विशेष रोल पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता भी मौजूद थे।
पर्यवेक्षकों की संख्या बढ़ाने की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, राज्य में सामान्य चुनाव पर्यवेक्षकों की संख्या 160 से बढ़ाकर करीब 294 किए जाने की योजना है। चुनाव आयोग हर विधानसभा क्षेत्र के लिए एक पर्यवेक्षक नियुक्त करने पर विचार कर रहा है। इसके अलावा व्यय पर्यवेक्षकों की संख्या भी 84 से बढ़ाकर लगभग 100 तक की जा सकती है। वहीं पुलिस पर्यवेक्षकों की संख्या भी बढ़ाने की तैयारी है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में जहां 37 पुलिस पर्यवेक्षक तैनात थे, इस बार उनकी संख्या दो से तीन गुना तक बढ़ सकती है।
सभी विधानसभा क्षेत्रों के लिए रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश
चुनाव आयोग ने राज्य सरकार के अधिकारियों को सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों के लिए रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। कई स्थानों पर अनुमंडल अधिकारी, जिला स्तरीय अधिकारी और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी यह जिम्मेदारी निभाएंगे।
16 मार्च तक हो सकता है चुनाव का एलान
सूत्रों के अनुसार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा 16 मार्च तक हो सकती है। संभावना जताई जा रही है कि मतदान अप्रैल में कराया जा सकता है।
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