पश्चिम बंगाल : के होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने कड़े कदम उठाने का फैसला किया है। बुधवार को राज्य सचिवालय में हुई एक उच्चस्तरीय प्रशासनिक समीक्षा बैठक में सभी व्यावसायिक संस्थानों को सख्त फायर सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन करने का निर्देश दिया गया है। बैठक में शहरी विकास एवं नगर पालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पाल, राज्य मंत्री उमेश राय, पर्यटन मंत्री शंकर घोष और अग्निशमन राज्य मंत्री कौशिक चौधरी शामिल हुए। इसके अलावा, फायर ब्रिगेड के महानिदेशक (DG) अनुज शर्मा और कोलकाता नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
पुरानी इमारतों और अवैध व्यावसायिक उपयोग पर विशेष नजर
अग्निशमन राज्य मंत्री कौशिक चौधरी ने बताया कि कोलकाता सहित पूरे राज्य की पुरानी इमारतों में चल रहे होटल और रेस्तरां प्रशासन की पैनी नजर में हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि कई जगहों पर सामान्य आवासीय इमारत के रूप में मंजूरी लेकर वहां होटल या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं। बैठक में कोलकाता के फ्री स्कूल स्ट्रीट (मिर्जा गालिब स्ट्रीट) में हाल ही में हुए दर्दनाक अग्निकांड का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। इस प्रकार की अनियमितताओं पर कोलकाता नगर निगम ने पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी है।
नियम तोड़ने वालों को नोटिस, अंतिम कदम होगा सील करना
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा मानकों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो संस्थान सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें सबसे पहले आधिकारिक नोटिस जारी किया जाएगा और कमियों को सुधारने के लिए एक निश्चित समयसीमा दी जाएगी। यदि तय समय के भीतर भी अग्निशमन मानकों को पूरा नहीं किया गया, तो संबंधित इमारत को खाली कराया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर उसे सील करने जैसी कठोर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
ओवरलोडिंग और बिजली ढांचे की होगी गहन जांच
होटलों में आग लगने का एक मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट होना पाया गया है। इसे ध्यान में रखते हुए केवल फायर सेफ्टी उपकरण ही नहीं, बल्कि पूरी बिजली व्यवस्था का भी निरीक्षण किया जाएगा। विशेष रूप से छोटे होटलों में स्वीकृत लोड से अधिक एसी (Air Conditioner) चलाने की शिकायतें मिली हैं, जहां अनुमति 2-3 एसी की होती है लेकिन वास्तविक उपयोग उससे कहीं अधिक होता है। इस तरह की गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए CESC और WBSEDCL जैसी विद्युत आपूर्ति कंपनियों को सक्रिय भूमिका निभाने और बिजली खपत पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
अब केवल फायर सर्टिफिकेट से नहीं चलेगा काम
राज्य सरकार के नए रुख के बाद अब व्यापारिक प्रतिष्ठानों के पास केवल कागजी फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (NOC) होना ही काफी नहीं होगा। आने वाले दिनों में प्रशासन इमारत के वास्तविक उपयोग, बिजली के बुनियादी ढांचे, स्वीकृत बिजली लोड और सुरक्षा उपकरणों की जमीनी स्थिति की भौतिक रूप से जांच करेगा। सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त रुख जारी रहेगा।