कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार की नई तबादला नीति लागू, एक ही पद पर लंबे समय तक नहीं रह सकेंगे कर्मचारी कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के कर्मचारियों की तबादला (ट्रांसफर) नीति में बड़ा बदलाव किया है। फील्ड स्तर के अधिकारियों से लेकर विस्तार अधिकारियों तक के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई है। मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने नबन्ना से इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है।
गृह जिले में पोस्टिंग पर सख्ती
नई नीति के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में किसी भी कर्मचारी को उसके गृह जिले में पोस्टिंग नहीं दी जाएगी। हालांकि, सेवानिवृत्ति से पहले के अंतिम दो वर्षों में प्रशासनिक आवश्यकता होने पर इस नियम में छूट दी जा सकती है और कर्मचारी को गृह जिले में तैनाती मिल सकती है।
एक ही पद पर अधिकतम चार वर्ष की सीमा
सरकार के निर्देशों के मुताबिक किसी कर्मचारी के एक ही पद पर लगातार तीन वर्ष पूरे होने के बाद उसके तबादले पर विचार किया जाएगा। साथ ही सामान्य तौर पर किसी भी कर्मचारी को एक ही पद पर चार वर्ष से अधिक समय तक नहीं रखा जाएगा।
संवेदनशील विभागों में दो वर्ष बाद तबादला
राजस्व संग्रह, कर संग्रह और अन्य संवेदनशील कार्यों से जुड़े अधिकारियों का तबादला दो वर्ष के अंतराल पर किया जाएगा। ऐसे अधिकारी अधिकतम तीन वर्ष तक ही एक ही पद पर बने रह सकेंगे।
जनहित और प्रशासनिक जरूरतों को मिलेगी प्राथमिकता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि तबादलों के दौरान प्रशासनिक सुविधा के साथ-साथ जनहित और संबंधित जिले की आवश्यकताओं का भी ध्यान रखा जाएगा। वहीं, विशेष प्रशासनिक जरूरतों या कठिन परिस्थितियों में इन नियमों में आवश्यक छूट दी जा सकती है।