बर्धमान/कोलकाता: पश्चिम बंगाल के आलू किसानों और व्यापारियों के लिए खुशखबरी है। राज्य की नई भाजपा सरकार ने दूसरे राज्यों में आलू भेजने पर लगी उस अघोषित पाबंदी को हटा लिया है, जो पिछले दो वर्षों (2023 और 2024) से लागू थी। इस फैसले से उन किसानों को बड़ी राहत मिली है जो सही बाजार न मिल पाने के कारण घाटे में चल रहे थे।
किसानों का दर्द: "गलत फैसले का भुगतना पड़ा खमियाजा"
किसानों और व्यापारियों का आरोप है कि पिछली सरकार के दौरान दूसरे राज्यों में आलू ले जाने वाले ट्रकों को पुलिस द्वारा रोका जाता था और सीमा पर वसूली की जाती थी। इस पाबंदी के कारण बंगाल के आलू ने पड़ोसी राज्यों जैसे ओडिशा, बिहार, झारखंड और असम का बाजार खो दिया।
बाजार पर असर: बंगाल से सप्लाई रुकने पर ओडिशा ने अपने यहां आलू की पैदावार बढ़ा दी, जबकि आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों के व्यापारियों ने वहां के बाजारों पर कब्जा कर लिया।
कीमतों में गिरावट: किसानों का कहना है कि इस साल आलू की बंपर पैदावार हुई है, लेकिन दूसरे राज्यों में मांग कम होने और पुराना बाजार हाथ से निकल जाने के कारण उन्हें उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं।
खाद की कीमतों और कालाबाजारी पर भी नजर
आलू किसानों की मांग है कि केवल निर्यात की छूट देना काफी नहीं है, बल्कि सरकार को खाद (विशेषकर 10-26-26) की आसमान छूती कीमतों पर भी लगाम लगानी चाहिए। किसानों के अनुसार, खाद के साथ जबरन 'माइक्रोन्यूट्रिएंट्स' खरीदने के लिए मजबूर किया जाना भी उनके मुनाफे को कम कर रहा है।
शुभेंदु सरकार का वादा
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और शुभेंदु अधिकारी ने किसानों से वादा किया था कि सत्ता में आते ही वे उनके हितों की रक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री ने अब किसानों के लिए कई घोषणाएं की हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में नई उम्मीद जगी है। किसानों को उम्मीद है कि भले ही पुराना बाजार वापस पाने में समय लगे, लेकिन अब कम से कम उन्हें पुलिसिया जुल्म और सीमाओं पर होने वाली वसूली से मुक्ति मिलेगी।