कोलकाता - पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट ने 17 जजों का अन्य जिलों में तबादला कर दिया है। यह कदम उन जिलों में लंबित मामलों के निपटारे और मतदाता सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
लंबित मामलों के निपटान के लिए जजों का ट्रांसफर
6 जज मालदा जिले में
5-5 जज मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जिलों में
1 जज दक्षिण 24 परगना जिले में
बांकुड़ा और पुरुलिया जिलों में विचाराधीन मतदाताओं के निपटान का कार्य लगभग पूरा हो चुका है, इसलिए इन अधिकारियों की सेवाओं का उपयोग अब अन्य संवेदनशील जिलों में किया जाएगा।
विचाराधीन मतदाता सूची और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी
राज्य भर में लगभग 60 लाख मतदाताओं के नाम 'विचाराधीन' श्रेणी में हैं। सुप्रीम कोर्ट की नियुक्त न्यायिक अधिकारियों की देखरेख में इन नामों की सूक्ष्म जांच की जा रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सूची के निपटारे के लिए नियुक्त जजों और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के कार्य में चुनाव आयोग का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
ट्रिब्यूनल का विकल्प
शीर्ष अदालत ने उन लोगों के लिए ट्रिब्यूनल का रास्ता भी खुला रखा है, जिनके नाम इस विशेष छंटनी प्रक्रिया के बाद सूची से बाहर हो जाएंगे। ऐसे मतदाता अपनी आपत्तियों के साथ ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील कर सकते हैं।
प्रशासनिक और चुनावी तैयारी
चुनाव आयोग और न्यायपालिका की इस सक्रिय भूमिका से यह सुनिश्चित होगा कि पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची पूरी तरह वैध और पारदर्शी हो। इस कदम से चुनावी प्रक्रिया में विश्वास और प्रशासनिक सक्षमता दोनों मजबूत होंगी।
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