रसोई घर में खुशबू और स्वाद बढ़ाने से लेकर मिठाइयों, पेय पदार्थों और खाद्य उद्योग में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली छोटी इलायची इन दिनों महंगी होती जा रही है। भारत के प्रमुख उत्पादक राज्य केरल के साथ मध्य अमेरिका के बड़े उत्पादक ग्वाटेमाला में इस साल उत्पादन प्रभावित होने से आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। कारोबारियों के अनुसार मौसम संबंधी परिस्थितियों का असर फसल पर पड़ा है, जबकि दूसरी ओर मांग में कमी के संकेत नहीं हैं। यही असंतुलन इलायची के बाजार में तेजी की बड़ी वजह बन रहा है।
2700 से 4500 रुपये किलो तक पहुंचा भाव
दिल्ली के खारी बावली स्थित इलायची कारोबारियों के अनुसार बाजार में फिलहाल तेजी का रुख बना हुआ है। थोक कारोबारी और निर्यातक कपिल जैन के मुताबिक अल नीनो के प्रभाव से इलायची की पैदावार प्रभावित हुई है, जिसका असर अब कीमतों में साफ दिखाई दे रहा है। वर्तमान में छोटी इलायची का औसत भाव करीब 3000 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है। हालांकि गुणवत्ता, आकार और श्रेणी के अनुसार कीमतों में बड़ा अंतर है और अलग-अलग ग्रेड की इलायची 2700 से 4500 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है।
7 से 9 मिलीमीटर इलायची की मांग बढ़ी
इलायची की कीमत केवल उत्पादन और मांग से तय नहीं होती, बल्कि उसके आकार और गुणवत्ता का भी इसमें बड़ा योगदान रहता है। नॉर्दर्न स्पाइसेज ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रवींद्र अग्रवाल के अनुसार इस समय बाजार में 7 से 9 मिलीमीटर आकार की छोटी इलायची की मांग बनी हुई है। पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इसके औसत भाव में करीब 10% की तेजी दर्ज की गई है। बड़े आकार और बेहतर गुणवत्ता वाली इलायची को बाजार में अधिक कीमत मिल रही है, जिससे औसत भाव पर भी दबाव बढ़ा है।
ग्वाटेमाला की पैदावार का भी असर
वैश्विक इलायची कारोबार में ग्वाटेमाला की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और भारत की तुलना में वहां प्रति एकड़ उत्पादन अधिक बताया जाता है। कारोबारियों के अनुसार ग्वाटेमाला में एक एकड़ भूमि से भारत के मुकाबले करीब 3 गुना इलायची पैदा होती है। ऐसे में वहां उत्पादन और आपूर्ति में होने वाला बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजार पर सीधा असर डालता है। इस वर्ष उत्पादन को लेकर बनी चिंता के कारण वैश्विक उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है, जिसका प्रभाव भारतीय बाजार में भी कीमतों के रूप में दिखाई दे रहा है।
त्योहारी मांग बढ़ने से और चढ़ सकते हैं दाम
आने वाले दिनों में इलायची की कीमतों को लेकर कारोबारियों की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि देश में त्योहारी मौसम शुरू हो चुका है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों, पकवानों और पारंपरिक पेय पदार्थों में इलायची की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। होटल, रेस्तरां और खाद्य उद्योग की मांग भी इस अवधि में बढ़ती है। ऐसे में यदि आपूर्ति मौजूदा स्तर पर सीमित रही तो बढ़ी हुई मांग कीमतों को और ऊपर ले जा सकती है।
बाजार में पर्याप्त भंडार नहीं, तेजी का खतरा बरकरार
कारोबारियों के मुताबिक फिलहाल बाजार में इलायची का पर्याप्त भंडार उपलब्ध नहीं है। कमजोर उत्पादन के बीच सीमित स्टॉक और त्योहारी मौसम की बढ़ती मांग कीमतों के लिए चुनौती पैदा कर रही है। यदि नई आपूर्ति अपेक्षा के अनुरूप बाजार में नहीं पहुंची तो आने वाले दिनों में इलायची के भाव में और तेजी देखी जा सकती है। इसका असर सबसे पहले थोक बाजार पर और फिर मिठाई, खाद्य उत्पाद तथा होटल-रेस्तरां कारोबार की लागत पर पड़ने की संभावना है। ऐसे में उपभोक्ताओं को त्योहारों के दौरान इलायची के लिए पहले से अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।