नई दिल्ली. इंश्योरेंस सेक्टर के शेयरों में आज बड़ी गिरावट देखने को मिली है। पीबी फिनटेक, टर्टलमिंट, एचडीएफसी लाइफ, एसबीआई लाइफ और आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के शेयर फोकस में आ गए हैं। सबसे ज्यादा उन कंपनियों के शेयर में गिरावट आई है जिनका बिजनेस मॉडल इंश्योरेंस बेचने और डिस्ट्रीब्यूशन से मिलने वाली कमाई पर ज्यादा निर्भर है। दोपहर 12.30 बजे पीबी फिनटेक शेयर 28 प्रतिशत गिरकर 1357.90 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। हाल में मार्केट में लिस्टिड टर्टलमिंट के शेयर में 20 प्रतिशत का लोअर सर्किट लगा और शेयर का प्राइस 109.04 रुपये हो गया। एचडीएफसी लाइफ शेयर 5 प्रतिशत गिरकर 532.80 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे।
IRDAI का प्रस्ताव क्या है
IRDAI ने इंश्योरेंस कंपनियों के एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट यानी ईओएम को धीरे-धीरे कम करने का प्रस्ताव दिया है। आसान भाषा में इंश्योरेंस कंपनियां अपने बिजनेस से होने वाली कमाई का कितना हिस्सा कमीशन, डिस्ट्रीब्यूशन और दूसरे खर्च पर कर सकती हैं इस पर लिमिट लगाने की दिशा में कदम उठाया गया है। जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए ईओएम लिमिट को पांच साल में मौजूदा 30 प्रतिशत जीएमपी से घटाकर 20 प्रतिशत जीडीपीआई तक लाने का प्रस्ताव है। लाइफ इंश्योरेंस के लिए कंपनी-लेवल ईओएम लिमिट 12.5 प्रतिशत जीडीपीआई प्रस्तावित है। यह प्रस्ताव अभी अंतिम नहीं है और 25 अक्टूबर तक सुझाव मांगे गए हैं।
कमीशन स्ट्रक्चर में बदलाव की चिंता
मार्केट की चिंता यह है कि अगर नए कमीशन नियम लागू होते हैं तो इंश्योरेंस बेचने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म और बाकी डिस्ट्रीब्यूटर्स को पहले जैसी कमाई नहीं हो सकती। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के अनुसार कमीशन में 10 प्रतिशत की कटौती होने पर इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूटर्स कंपनियों की कमाई पर 10 से 12 प्रतिशत तक असर पड़ सकता है। आईआरडीएआई ने कमीशन को सभी इंश्योरेंस प्रोडक्ट के लिए एक जैसा रखने के बजाय प्रोडक्ट की जटिलता, बिक्री चैनल और कस्टमर को दी जाने वाली सर्विस के हिसाब से तय करने का प्रस्ताव रखा है। हेल्थ, मोटर और टर्म इंश्योरेंस जैसे कारोबार में प्रस्तावित कमीशन लिमिट से डिस्ट्रीब्यूटर्स की कमाई प्रभावित हो सकती है।
डार्क पैटर्न और कस्टमर जानकारी का मुद्दा
IRDAIका यह प्रस्ताव इंश्योरेंस वेबसाइट से भी जुड़ा है। अभी कई वेबसाइटों पर कस्टमर को कीमत या प्लान की पूरी जानकारी देखने से पहले अपना मोबाइल नंबर, ईमेल या दूसरी प्राइवेट जानकारी देनी पड़ती है। आईआरडीएआई इसे डार्क पैटर्न मानता है। अगर प्रस्ताव लागू होता है तो कंपनियों को बिना प्राइवेट जानकारी के प्रोडक्ट, कीमत और फीचर्स की साफ जानकारी देनी होगी। इसका उद्देश्य कस्टमर को पहले जानकारी देना और उसके बाद खरीद का फैसला लेना है। नए नियमों का असर बैंक और लोन के साथ इंश्योरेंस बेचने वाले चैनलों पर भी पड़ सकता है।
मार्केट का रुख और आगे की स्थिति
अभी यह अंतिम नियम नहीं है। IRDAI ने प्रस्ताव पर इंडस्ट्री और दूसरे हितधारकों से 25 अक्टूबर तक सुझाव मांगे हैं। इसका मतलब है कि आगे नियमों में बदलाव संभव है। इसलिए मौजूदा गिरावट को सिर्फ कंपनियों के बिजनेस में तत्काल बदलाव मानना सही नहीं होगा। मार्केट फिलहाल यह अनुमान लगाने की कोशिश कर रहा है कि नए नियम लागू होने पर कमीशन, कॉस्ट और प्रॉफिट पर कितना असर पड़ सकता है। कंपनियों की कमाई पर कितना असर पड़ेगा इसकी स्पष्ट जानकारी नियम लागू होने के बाद साफ होगी। निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।