मुंबई: भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ शुरुआत की। हालिया गिरावट के बाद बाजार में रिकवरी का दौर जारी है। शुरुआती कारोबार में रियल्टी, मेटल और फार्मा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में खुले
शुक्रवार को सेंसेक्स 163.35 अंक यानी 0.21 प्रतिशत चढ़कर 77,701.07 के स्तर पर खुला। वहीं, निफ्टी 52.20 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,284.05 पर पहुंच गया। बाजार में शुरुआती तेजी के बीच निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर बनी हुई है।
रियल्टी-मेटल और फार्मा शेयरों में खरीदारी
क्षेत्रीय सूचकांकों में निफ्टी रियल्टी शुरुआती कारोबार में सबसे मजबूत रहा और 0.70 प्रतिशत चढ़ा। इसके बाद निफ्टी मेटल 0.48 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा 0.32 प्रतिशत बढ़ा। इसके अलावा निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर और निफ्टी REITS एंड रियल्टी में भी क्रमशः 0.32 प्रतिशत और 0.28 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली।
IT और ऑटो शेयरों पर दबाव
दूसरी ओर, निफ्टी IT शुरुआती कारोबार में सबसे कमजोर क्षेत्रीय सूचकांक रहा और 0.60 प्रतिशत नीचे आया। निफ्टी मिडस्मॉल IT एंड टेलीकॉम में 0.17 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
कच्चे तेल की कीमतें बनी चिंता
बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में से एक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 94 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इससे भारत जैसे कच्चे तेल के बड़े आयातक देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में दोबारा बढ़ोतरी से भी लार्ज-कैप शेयरों पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे माहौल में निवेशक ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली कर सकते हैं।
घरेलू बाजार में मजबूती की उम्मीद
इसके बावजूद संस्थागत खरीद और घरेलू अर्थव्यवस्था की बेहतर बुनियादी स्थिति के कारण व्यापक बाजार में मजबूती बने रहने की उम्मीद है। NBFC सेक्टर मजबूत स्थिति में बना हुआ है। वहीं, डिजिटल प्लेटफॉर्म, फार्मा और CDMO कंपनियों के शेयरों में ऊंचे वैल्यूएशन के बावजूद खरीदारी का रुझान जारी है।
एशियाई बाजारों में कमजोरी
एशियाई बाजारों में शुक्रवार को अधिकांश प्रमुख सूचकांक कमजोर रहे। वॉल स्ट्रीट में कमजोरी के बाद अमेरिकी ट्रेजरी की लंबी अवधि की यील्ड में बढ़ोतरी का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। इस बीच, ईरान को लेकर अमेरिकी रुख और संभावित आपूर्ति बाधित होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड 93.96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। कुल मिलाकर, घरेलू बाजार में शुरुआती तेजी के बावजूद निवेशकों की नजर कच्चे तेल, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के संकेतों पर बनी रहेगी।