नई दिल्ली: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर सामने आई है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने दावा किया है कि देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। संगठन को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बाजार में आपूर्ति सामान्य होने के साथ खुदरा चीनी की कीमतों में गिरावट आएगी।
ISMA के अध्यक्ष के मुताबिक, हालिया तेजी के पीछे वास्तविक कमी से ज्यादा बाजार में जमाखोरी और व्यापारियों द्वारा अधिक मात्रा में स्टॉक रखना प्रमुख कारण रहे हैं। वहीं, मौसम संबंधी चुनौतियों से गन्ने की फसल प्रभावित होने के कारण उत्पादन भी अनुमान से कम रहा, जिससे बाजार पर अस्थायी दबाव बना।
चीनी की कीमतों में अचानक क्यों आया उछाल?
ISMA के मुताबिक चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण एक साथ जिम्मेदार रहे हैं। इनमें बाजार में सट्टेबाजी और जमाखोरी प्रमुख हैं।व्यापारियों की ओर से बड़ी मात्रा में चीनी का भंडारण किए जाने से बाजार में उपलब्ध आपूर्ति प्रभावित हुई। इससे मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन की धारणा बनी और कीमतों पर दबाव बढ़ गया।ISMA का कहना है कि यह स्थिति देश में चीनी की वास्तविक कमी को नहीं दर्शाती है, बल्कि बाजार में बनी अस्थायी परिस्थितियों का परिणाम है।
मौसम की मार से गन्ने का उत्पादन प्रभावित
चीनी की कीमतों में तेजी का एक कारण गन्ने की फसल पर मौसम का असर भी रहा है। कम बारिश और अत्यधिक गर्मी जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों ने कुछ क्षेत्रों में गन्ने की पैदावार को प्रभावित किया।गन्ने की उपलब्धता कम होने से चीनी मिलों के उत्पादन पर भी असर पड़ा। परिणामस्वरूप चीनी का कुल उत्पादन शुरुआती अनुमानों की तुलना में कम रहने की स्थिति बनी और बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ा।
देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद
ISMA अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। संगठन के मुताबिक बाजार में पर्याप्त मात्रा में चीनी का स्टॉक मौजूद है।उनके अनुसार, जैसे-जैसे जमाखोरी और सट्टेबाजी की स्थिति सामान्य होगी और बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ेगी, कीमतों पर बना दबाव कम होने की संभावना है।
सितंबर के अंत तक 35 लाख टन क्लोजिंग स्टॉक
नीरज शिरगाओकर के मुताबिक सितंबर के अंत तक चीनी का क्लोजिंग स्टॉक करीब 35 लाख टन रहने का अनुमान है।यह स्टॉक बाजार की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। संगठन का मानना है कि उपलब्ध स्टॉक और नई पेराई शुरू होने के बाद बाजार में आपूर्ति की स्थिति और बेहतर होगी।
15 अक्टूबर तक शुरू हो सकती है मिलों की पेराई
ISMA अध्यक्ष ने बताया कि चीनी मिलें लगभग 15 अक्टूबर तक अपना परिचालन शुरू कर सकती हैं। अक्टूबर में मिलों से करीब 10 से 12 लाख टन चीनी उत्पादन होने का अनुमान जताया गया है।नई पेराई शुरू होने के साथ बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे आपूर्ति संबंधी दबाव कम होने और कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।
अक्टूबर में 24-25 लाख टन चीनी की मांग का अनुमान
ISMA के अनुसार अक्टूबर महीने में देश में चीनी की मांग करीब 24 से 25 लाख टन रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले मिलों से लगभग 10-12 लाख टन नए उत्पादन की उम्मीद है।ऐसे में मौजूदा स्टॉक बाजार की मांग पूरी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। संगठन का कहना है कि देश में उपलब्ध भंडार के कारण उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति संकट की स्थिति नहीं है।
जल्द कम हो सकते हैं चीनी के खुदरा दाम
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी से परेशान आम उपभोक्ताओं के लिए ISMA का अनुमान राहत देने वाला है। संगठन का मानना है कि बाजार में सट्टेबाजी और भंडारण पर नियंत्रण आने के बाद खुदरा कीमतों में जल्द कमी आ सकती है।हालांकि, कीमतों में वास्तविक गिरावट कितनी और कितने समय में होगी, यह बाजार में आपूर्ति, मांग और नई चीनी मिलों के उत्पादन पर निर्भर करेगा।