अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह डीजल एक्सपोर्ट पर बैन लगाने के लिए अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं। अमेरिका में डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। 23 सितंबर को औसत अमेरिकी डीजल कीमत करीब 6.52 डॉलर प्रति गैलन पर पहुंच गई जो एक साल पहले के मुकाबले लगभग 76 प्रतिशत ज्यादा है। ट्रंप ने 22 सितंबर को कहा था कि वह अमेरिकी डीजल के एक्सपोर्ट पर रोक लगाने के पक्ष में हैं। उनका तर्क है कि अगर अमेरिका में बनाया गया डीजल विदेश जाने के बजाय घरेलू बाजार में रहेगा तो सप्लाई बढ़ेगी और कीमत नीचे आ सकती है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने प्रशासन के लोगों से इस बारे में बात की है और फैसला जल्दी हो सकता है।
अमेरिकी तेल कंपनियों की चिंता
अमेरिकी तेल कंपनियों के अधिकारी ट्रंप प्रशासन को मनाने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं ताकि डीजल के निर्यात पर रोक न लगाई जाए। उन्हें डर है कि इससे पूरा कारोबार चौपट हो जाएगा। निर्यात पर बैन लगने से कंपनियों की कमाई प्रभावित हो सकती है और वैश्विक बाजार में अमेरिकी डीजल की उपलब्धता कम हो जाएगी। बाजार में हलचल मची हुई है क्योंकि फैसला जल्द हो सकता है। अगर बैन लगता है तो इसका असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी दुनिया की चपेट में आएगा क्योंकि बाजार में तेल की कमी होगी।
भारत कितना डीजल मंगाता है
भारत अमेरिका से डीजल मंगाता है लेकिन बहुत मामूली मात्रा में। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 118.85 मिलियन टन डीजल का उत्पादन किया। लेकिन सिर्फ 0.04 मिलियन टन यानी करीब 40 हजार टन डीजल ही बाहर से मंगाया। इसके मुकाबले भारत ने करीब 28.03 मिलियन टन डीजल एक्सपोर्ट किया। सरकार के मुताबिक भारत की रिफाइनिंग क्षमता घरेलू पेट्रोल-डीजल की जरूरत से ज्यादा है इसलिए भारत कुल मिलाकर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का नेट एक्सपोर्टर है। अमेरिकी बैन का सीधा असर भारत की सप्लाई पर बहुत कम पड़ने की संभावना है।
भारत में दाम बढ़ने की आशंका
अगर अमेरिकी डीजल निर्यात पर बैन लगता है तो वैश्विक बाजार में सप्लाई कम होने से कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। भारत पर इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल महंगा होने से आयात लागत बढ़ सकती है। हालांकि भारत की घरेलू उत्पादन क्षमता मजबूत है और वह नेट एक्सपोर्टर है इसलिए दाम 100 रुपये के पार जाने की स्थिति फिलहाल दूर की कौड़ी लगती है। फिर भी वैश्विक कीमतों में उछाल का असर घरेलू बाजार पर पड़ना स्वाभाविक है। उपभोक्ताओं और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को सतर्क रहने की जरूरत है।
घरेलू कंपनियों के लिए मौका
भारत की मजबूत रिफाइनिंग क्षमता और निर्यात की स्थिति को देखते हुए यह स्थिति घरेलू तेल कंपनियों के लिए कमाई का मौका भी बन सकती है। वैश्विक बाजार में सप्लाई कम होने पर भारतीय कंपनियां अधिक निर्यात कर सकती हैं। सरकार और कंपनियां आपूर्ति संतुलन बनाए रखने के प्रयास करेंगी। अमेरिकी फैसले का अंतिम रूप क्या होता है यह देखना होगा। फिलहाल भारत की स्थिति अपेक्षाकृत सुरक्षित है लेकिन वैश्विक बाजार की निगरानी जरूरी है। दाम स्थिर रखने और आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित रहेगा।