तेजी से विलुप्त हो रहे गिद्धों को लेकर वन विभाग अब संरक्षण करने में लगा है। प्रदेशभर के जंगलों में एक साथ गिद्धों की गिनती होगी, जो जनवरी 2024 में रखी गई है। दो साल में एक बार होने वाली गणना को लेकर वनकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से कार्यशाला रखी गई है।
इंदौर वनमंडल के लिए 20 दिसंबर को कार्यशाला होगी, जिसमें वनकर्मियों को गणना संबंधित दिशा-निर्देशों के बारे में बताया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक 2021 में गिद्ध गणना की गई थी। उसके बाद अब 2024 में गिद्धों की गिनती होगी। वैसे पिछली गणना में इंदौर वनमंडल में 36 स्थानों पर 117 गिद्ध मिले थे।
2016 में पहली मर्तबा प्रदेशभर में गिद्धों की गिनती हुई, जहां 33 जिलों के 900 से ज्यादा स्थान चयनित किए गए हैं। सुबह छह से आठ बजे के बीच गिद्ध गणना होती है। 2019 और 2021 के बाद जनवरी 2024 में गिद्धों को गिनने के लिए वनकर्मी जंगल को नापेंगे। खाली जगह और पेड़ पर बैठे गिद्धों को गणना में शामिल किया जाता है। साथ ही इनकी फोटोग्राफी भी करनी होती है।
प्रदेशभर में एजिप्सिया, वाइट रम्प्ड, किंग कल्चर, लांग बिल्ड और यूरेशियस और सिलेंडर बिल्ड प्रमुख हैं। इंदौर वनमंडल में ज्यादातर गिद्ध इजिप्सया प्रजाति के पाए जाते हैं, जिनकी गर्दन व शरीर सफेद और चोंच पीले रंग की होती है। पिछली बार गणना में गिद्धों की संख्या नौ हजार तक पहुंच चुकी थी।
तेजी से विलुप्त हो रहे गिद्धों को लेकर वन विभाग अब संरक्षण करने में लगा है। प्रदेशभर के जंगलों में एक साथ गिद्धों की गिनती होगी, जो जनवरी 2024 में रखी गई है। दो साल में एक बार होने वाली गणना को लेकर वनकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से कार्यशाला रखी गई है।
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