श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत पर केंद्र सरकार बेहद चिंतित है। चीतों की मौत की समीक्षा करने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के विशेषज्ञों की टीम कूनो आएगी। भोपाल पहुचें केंद्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, हम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चीता विशेषज्ञों के सतत संपर्क में हैं। वे सतत समीक्षा कर रहे हैं। चीता परियोजना ठीक से चल रही है। उसमें किसी भी तरह के बदलाव की कोई जरूरत महसूस नहीं हो रही है।
दो वयस्क चीतों की मौत ।
बता दें कि चार दिन के अंदर कूनो में दो वयस्क चीतों की मौत हो गई है। भूपेन्द्र यादव ने कहा चीतों को यहां के वातावरण में ढलने में वक्त लगेगा। चीते मध्य प्रदेश से कहीं और नहीं भेजे जाएंगे। चीतों की अच्छी देखभाल के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। चीता एक्शन प्लान में जो भी संभावनाएं बताई गई हैं, उन्हें हम देख रहे हैं। हम सारी चिंताओं से वाकिफ हैं और संवेदनशील तरीके से इसके निष्पादन के लिए काम कर रहे हैं। प्रदेश की जनता, स्थानीय लोगों का सहयोग और वन विभाग का परिश्रम रंग लाएगा।
17 सितंबर को पीएम नरेन्द्र मोदी ने चीते छोड़े थे
दरअसल, कूनो नेशनल पार्क में बीते 4 महीनें में 5 वयस्क और 3 चीता शावकों की मौत ने प्रबंधन की लापरवाही उजागर कर दी है। इससे भारत ही नहीं दुनिया के लिए भी अनूठे एक से दूसरे महाद्वीप में चीता पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट को लेकर चिंता बढ़ रही है। 17 सितंबर, 2022 को पीएम नरेन्द्र मोदी ने कूनो में नामीबिया से लाए चीते छोड़े थे। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाकर छोड़े गए। मादा चीता दक्षा, नर चीता तेजस और सूरज की जान संघर्ष के दौरान घायल होने के बाद गई। 3 शावकों और दो वयस्क चीतों की मौत प्राकृतिक होने की बात कही गई।
अब कूनो में 15 चीते और एक शावक बचे
कूनो में चीतों की 24 घंटे मानव संसाधनों के साथ हाई टेक निगरानी का दावा किया जाता है, इसके बावजूद न तो प्रबंधन उनकी लड़ाई समय रहते देख पाया न ही घायल होने के बाद तुरंत इलाज दे पाया। घायल मिलने के बाद 3 से 4 घंटे में ही चीतों ने दम तोड़ दिया। अब कूनो में 15 चीते और एक शावक बचा है।
Comments (0)