मध्यप्रदेश समेत पूरे देश में इस समय साइबर अपराध के मामले लगातार सामने आ रहे है। इसमें भी साइबर अपराधियों ने ठगी के नए-नए तरीके खोज निकाले है। इसमें से एक है डिजिटल अरेस्ट, जिसकी खूब चर्चा हो रही है। इसके तहत अपराधी खुद को बड़ा अधिकारी बताकर लोगों से ऑनलाइन ठगी करता है। इंदौर में इसके कई मामले देखने को मिले है।लेकिन अब इससे निपटने के लिए केंद्र स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। 1000 कमांडों की टीम को साइबर अपराधों से निपटने की ट्रेनिंग दी जारी है। जिसमे मध्यप्रदेश के 7 पुलिस जवानों का चयन हुआ है।
डिजिटल अरेस्ट ठगी का नया तरीका
मध्यप्रदेश में इस समय डिजिटल अरेस्ट ठगी का नया तरीका बन गया है , जिसके जरिए अपराधी खुद को कानून का अधिकारी, जैसे पुलिस, सीबीआई या फिर कस्टम विभाग के अधिकारी बताकर लोगों को अपना शिकार बनाते है। ये अपराधी वीडियो या ऑडियो कॉल के जरिए लोगों को फर्जी मामलों में फसाने की धमकी देकर उनसे पैसे ऐंठ लेते है।
इंदौर से कई मामले आए सामने
इंदौर में डिजिटल अरेस्ट की कई घटनाएं सामने आई है, जहां अपराधियों ने इस तकनीक का इस्तेमाल कर लाखों रुपए की ठगी को अंजाम दिया है। बता दें कि इंदौर में सायबर गिरोह के द्वारा एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर महिला से ऑनलाइन ठगी की गई। जानकारी के अनुसार महिला से ड्रग्स और फर्जी पासपोर्ट के नाम पर 12 लाख रुपय ठगे। वही इंदौर पुलिस में हाल ही में ऐसे ही एक बड़े गैंग का भंडाफोड़ किया। जिसमें 1400 सिम कार्ड और 34 बैंक खाते जुड़े हुए थे। आम लोगों के अलावा पेशेवरों को भी निशाना बनाया गया है।
मध्यप्रदेश के 7 जवानों का हुआ चयन
देशभर में साइबर अपराधों के बढ़ाते आकड़ों को देखते हुए बड़ा फैसला लिया गया है। जिसके तहत इन अप्राधिओं से निपटने के लिए 1000 कमांडो की टुकड़ी की ट्रेनिंग शुरू हुई है। 6 महीने तक देश के अलग-अलग संस्थानों में साइबर अपराध से निपटने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें मध्यप्रदेश के 7 जवानों का चयन हुआ है।
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