छत्तीसगढ़ में जल्द ही नगरीय निकाय चुनाव होने वाले हैं, जबकि पंचायत चुनाव भी नजदीक ही है, ऐसे में साय सरकार निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराने की तैयारी में है। इसके लिए सरकार ने डिप्टी सीएम अरुण साव की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई है, जबकि एक साथ चुनाव कराने के लिए जनता से सुझाव भी मांगे हैं। यह समिति एक साथ चुनाव कराने के लिए सभी पक्षों पर स्टडी करेगी और उसके बाद सरकार दोनों चुनाव एक साथ कराने का फैसला ले सकती है।
कानूनी प्रावधानों पर भी विचार विमर्श होगा
डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि देश में वन नेशन वन इलेक्शन की चर्चा हो रही है। ऐसे में छत्तीसगढ़ की सरकार भी इसी दिशा में पहल कर रही है। पंचायत और निकाय चुनाव एक साथ कराने के लिए एक समिति भी बनाई गई है। इसमें जनता से राय ली जाएगी और कानूनी प्रावधानों पर भी विचार विमर्श होगा। साव ने कहा कि निकाय और पंचायत चुनाव के संचालन के लिए फिलहाल अलग-अलग नियम बने हुए हैं, ऐसे विधि जानकारों से चर्चा के बाद एक संभावना कैसे बनती है। इस पर विचार किया जाएगा।
पहले थी ये प्रणाली
दरअसल, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार आने के बाद नगर निगम में महापौर के चुनाव के लिए अप्रत्यक्ष प्रणाली लागू की गई थी। यानि चुने हुए पार्षद ही किसी एक महापौर चुनते थे। इसके लिए केवल पार्षदों के बीच ही वोटिंग होती थी। लेकिन अब साय सरकार फिर से प्रत्यक्ष प्रणाली ला सकती है। यानि आम लोग महापौर पद के लिए भी वोटिंग करके सीधे महापौर चुनेंगे। डिप्टी सीएम अरुण साव ने इसके संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर यह नियम फिर से लाया जाएगा।
कब हुए थे पिछले चुनाव
छत्तीसगढ़ में 2019 में नगरीय निकाय चुनाव हुए थे, ऐसे में अब सभी निकायों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में अब जल्द ही निर्वाचन आयोग निकाय चुनाव की तैयारियों शुरू कर सकता है। जबकि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2020 में हुए थे। पंचायत चुनाव 2020 में जनवरी-फरवरी के महीने में संपन्न हुए थे। ऐसे में पंचायतों का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है। जिससे राज्य में चुनाव की तैयारियां शुरू हो रही हैं।
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