भोपाल के एम्स भोपाल में फेफड़ों की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए बड़ी राहत मिलने वाली है। संस्थान में लंग ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू करने की तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं। इसके शुरू होने के बाद मरीजों को इलाज के लिए मुंबई या दिल्ली जैसे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे समय और खर्च दोनों में राहत मिलेगी।
28 मार्च को राष्ट्रीय सिम्पोजियम
एम्स भोपाल में 28 मार्च को “लंग ट्रांसप्लांट: द रोड अहेड” विषय पर एक राष्ट्रीय सिम्पोजियम आयोजित किया जाएगा। इसमें देशभर के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल होंगे और लंग ट्रांसप्लांट से जुड़ी नवीनतम तकनीक, चुनौतियों और प्रबंधन के पहलुओं पर चर्चा करेंगे।
मुंबई-दिल्ली के विशेषज्ञ देंगे मास्टर ट्रेनिंग
सिम्पोजियम के दौरान अनुभवी डॉक्टर एम्स की मेडिकल टीम को मास्टर ट्रेनिंग देंगे। इसमें सर्जिकल तकनीक, मरीजों का चयन, ऑपरेशन के दौरान सावधानियां, जटिलताओं का प्रबंधन और पोस्ट-ट्रांसप्लांट केयर जैसे विषयों पर गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे स्थानीय डॉक्टरों की विशेषज्ञता और दक्षता में वृद्धि होगी।
एम्स की टीम तैयार, अंतिम चरण की तैयारी
एम्स भोपाल के डॉक्टर पहले ही लंग ट्रांसप्लांट की तकनीकी ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं। अब ऑपरेशन थिएटर, ICU, क्रिटिकल केयर यूनिट और पोस्ट-ट्रांसप्लांट केयर सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक जटिल और मल्टी-डिसिप्लिनरी प्रक्रिया है, जिसमें विभिन्न विभागों का समन्वय महत्वपूर्ण है।
अत्याधुनिक उपकरणों से होगा ऑपरेशन
एम्स में लंग ट्रांसप्लांट के लिए ECMO, हार्ट-लंग मशीन और IABP जैसी उन्नत तकनीकें लगाई जा रही हैं। ये उपकरण ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति स्थिर रखने और सफलता दर बढ़ाने में मदद करेंगे।
प्रदेश के मरीजों को सीधा लाभ
अब तक मध्यप्रदेश के मरीजों को लंग ट्रांसप्लांट के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। एम्स भोपाल में यह सुविधा शुरू होने के बाद मरीज अपने ही शहर में उच्च स्तरीय इलाज पा सकेंगे, समय पर उपचार संभव होगा और जोखिम कम होगा।