मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस के अवसर पर भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘आनंद के आयाम’ को संबोधित करते हुए भारतीय संस्कृति की मूल भावना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आदिकाल से ही भारत की पहचान ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ रही है, जहां पूरे विश्व को एक परिवार माना जाता है।
नरोन्हा अकादमी में हुआ आयोजन
यह संगोष्ठी आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आनंद विभाग द्वारा आयोजित की गई। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और ‘आनंद उत्सव’ के विजेताओं को चेक व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
सुख-दुख के संतुलन में ही आनंद
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में वास्तविक आनंद, सुख और दुख के बीच संतुलन समझने से मिलता है। उन्होंने भारतीय परिवार व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां एक व्यक्ति की कमाई से पूरा परिवार सम्मानपूर्वक जीवन जीता है- जो भारतीय संस्कृति की विशेषता है।
सनातन संस्कृति का मूल संदेश
डॉ. यादव ने कहा कि दूसरों के सुख में आनंद महसूस करना ही सनातन संस्कृति का सार है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी स्थिर बुद्धि और संतुलन बनाए रखना ही सच्चा आनंद है।
साधना और संतों के जीवन से सीख
मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ जैसे आयोजनों का जिक्र करते हुए कहा कि संत कठिन परिस्थितियों में भी साधना के माध्यम से आनंद की अनुभूति करते हैं। यही भारतीय परंपरा की गहराई और शक्ति को दर्शाता है।
‘आनंद ही ब्रह्म’- संतों का संदेश
कार्यक्रम में संत महर्षि मधुसूदन महाराज ने कहा कि वेदांत में आनंद को ही ब्रह्म माना गया है, जो पूरे संसार को गति देता है। उन्होंने गीता के ज्ञान को जीवन में अपनाने पर जोर दिया।
प्रदेश में आनंद विभाग की पहल
आनंद विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में ब्लॉक स्तर तक सरकारी कर्मचारियों और विद्यार्थियों के लिए विभिन्न गतिविधियां चलाई जा रही हैं, ताकि वे मानसिक रूप से खुश और संतुलित रह सकें।
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