छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक परिवहन से सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही बढ़े हुए बस किराए का सामना करना पड़ सकता है। राज्य में यात्री बसों की नई किराया दरें 23 सितंबर से लागू होने के संकेत मिल रहे हैं।प्रस्ताव को परिवहन और वित्त विभाग से हरी झंडी मिल चुकी है। अब इसे विधि विभाग की मंजूरी का इंतजार है। इसके बाद प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में अंतिम स्वीकृति के लिए रखा जाएगा।
5 किलोमीटर के लिए ₹12, फिर हर KM ₹1.75
प्रस्तावित नई दरों के मुताबिक सामान्य सीटिंग यात्री बसों में शुरुआती 5 किलोमीटर का किराया ₹12 रखा गया है। इसके बाद प्रत्येक किलोमीटर के लिए ₹1.75 अतिरिक्त किराया प्रस्तावित है।
दूरी/दर मौजूदा किराया प्रस्तावित किराया
शुरुआती 5 KM ₹10 ₹12
इसके बाद प्रति KM ₹1 ₹1.75
नई दरें लागू होने पर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के कुल किराए में भी बढ़ोतरी होगी।
22 सितंबर से हड़ताल का ऐलान
बस किराया बढ़ाने और अपनी अन्य मांगों को लेकर बस ऑपरेटरों के बीच भी मतभेद सामने आए हैं। यातायात महासंघ के अध्यक्ष ने 22 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है।हड़ताल की तारीख को लेकर राजनीतिक और परिवहन क्षेत्र में चर्चा भी हो रही है, क्योंकि इसे कैबिनेट की संभावित मंजूरी से ठीक एक दिन पहले बुलाया गया है।
दूसरे बस ऑपरेटर संगठन ने हड़ताल से बनाई दूरी
वहीं, बस ओनर्स फेडरेशन ऑफ छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को परिवहन मंत्री , परिवहन सचिव और अपर परिवहन आयुक्त से मुलाकात की।प्रतिनिधिमंडल में फेडरेशन के संरक्षक , अध्यक्ष और सचिव शामिल रहे।फेडरेशन ने सरकार के सकारात्मक रुख की सराहना करते हुए कहा कि जब शासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर रहा है, तो आम यात्रियों को परेशानी में डालने वाली हड़ताल का समर्थन नहीं किया जाएगा।
महिला यात्रियों की सुरक्षा पर भी नए निर्देश
बैठक के दौरान महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यदि बस में पहली या अंतिम सवारी महिला होती है, तो वाहन की ऑनलाइन लाइव ट्रैकिंग अनिवार्य होगी।बसों में लगे कैमरे और ट्रैकिंग डिवाइस हर समय सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा और बस संचालन की निगरानी को मजबूत करना है।
बस ऑपरेटरों ने रखीं 9 सूत्रीय मांगें
बढ़ती डीजल कीमतों और बस संचालन की लागत को देखते हुए यातायात महासंघ ने सरकार के सामने नौ सूत्रीय मांगें रखी हैं।इनमें सिंगल स्लीपर सीट पर सिंगल टैक्स, ई-बसों का संचालन शहर की सीमा तक सीमित रखने और ऑनलाइन परमिट जैसी मांगें शामिल हैं।अब सभी की नजरें विधि विभाग की मंजूरी और इसके बाद होने वाली कैबिनेट बैठक पर हैं। अंतिम फैसला होने के बाद ही नई किराया दरों की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होगी।