रायपुर। मनरेगा का नाम बदलकर वीबी जी राम जी योजना किए जाने के फैसले ने सियासत को पूरी तरह गर्मा दिया है। शुरुआत एक प्रशासनिक निर्णय से हुई, लेकिन अब यह मामला सीधे राजनीतिक वर्चस्व और वैचारिक टकराव में बदल चुका है। सत्ता और विपक्ष आमने-सामने हैं और बहस अब सिर्फ योजना तक सीमित नहीं रही।
बीजेपी के फायरब्रांड विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस नेतृत्व को खुली बहस की चुनौती देकर राजनीतिक पारा और चढ़ा दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि योजना के नाम, उसके उद्देश्य और सरकार के कामकाज—हर मुद्दे पर आमने-सामने बैठकर चर्चा करने को वह पूरी तरह तैयार हैं।
अजय चंद्राकर की इस चुनौती पर कांग्रेस ने भी पलटवार किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि अगर बहस करनी ही है, तो सिर्फ एक योजना पर क्यों? पूरी सरकार की नीतियों, फैसलों और कामकाज पर सार्वजनिक डिबेट होनी चाहिए। उनका कहना है कि कांग्रेस किसी भी मंच पर सरकार की नाकामियों को उजागर करने से पीछे नहीं हटेगी।
दरअसल, मनरेगा का नाम बदलना अब केवल शब्दों का खेल नहीं रह गया है। इसके पीछे की मंशा, राजनीतिक संदेश और इसका सामाजिक प्रभाव—इन सबको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्ष इसे जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश बता रहा है, जबकि सरकार इसे नई सोच और नए दृष्टिकोण से जोड़कर पेश कर रही है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह टकराव ऐसे वक्त में सामने आया है जब जनता रोजगार, महंगाई और विकास जैसे बुनियादी मुद्दों पर जवाब चाहती है। लेकिन सियासी बयानबाजी और बहस की चुनौती के शोर में आम लोगों के सवाल कहीं दबते नजर आ रहे हैं।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि यह खुली बहस वास्तव में होती है या फिर यह भी महज राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाती है। फिलहाल इतना तय है कि वीबी जी राम जी योजना ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को एक नए सियासी मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां आने वाले दिनों में सियासी तापमान और बढ़ सकता है।
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