गृहमंत्री विजय शर्मा ने आज विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या भ्रामक जानकारी के जरिए होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। इस पर चर्चा के बाद इसे पारित किया जाएगा। वहीं, विपक्ष ने इसका विरोध करते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया।
वहीं, आज की कार्यवाही के दौरान शून्यकाल में विपक्ष ने SIR से जुड़े मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया। नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि प्रदेश में 19 लाख नाम हटाए गए हैं। इस पर अजय चंद्राकर ने कहा कि यह जनहित का नहीं बल्कि निर्वाचन से जुड़ा विषय है। इस मुद्दे पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ और पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। अंततः विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।
इसके अलावा वीरता पदक प्राप्तकर्ताओं को मिलने वाली सुविधाओं और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को लेकर भी सवाल-जवाब हुए।
विपक्ष ने किया धर्म स्वतंत्रता बिल का विरोध
धर्म स्वतंत्रता बिल पेश होते ही नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कानून देश के कई राज्यों में पहले से हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है, इसलिए इस बिल को जल्दबाजी में पास नहीं किया जाना चाहिए।
महंत ने मांग की कि बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए, ताकि इस पर विस्तार से चर्चा हो सके। उन्होंने कहा कि इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों के साथ-साथ सभी दलों के विधायकों की राय ली जानी चाहिए।
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