मध्य प्रदेश के लाखों किसान बीते तीन महीनों से मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की 14वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। नवंबर में पीएम किसान की पिछली किस्त मिलने के बाद सभी की निगाहें राज्य सरकार की इस योजना पर टिक गई थीं। हालांकि, इस बार प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रही, जिससे किसानों में असमंजस का माहौल भी बना। अब अधिकारियों के हवाले से प्राप्त ताज़ा सूचनाओं ने आशा जगाई है कि 15 फरवरी से पहले राशि वितरण का कार्यक्रम संपन्न कराया जा सकता है। प्रशासनिक स्तर पर फाइलों की जांच, सत्यापन और पेमेंट प्रक्रिया लगभग पूरी मानी जा रही है, जिससे संकेत मिलता है कि घोषणा किसी भी दिन संभव है।
शिवरात्रि से पहले राहत देने की योजना
15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व है और सरकार चाहती है कि त्योहार से पहले किसानों को आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाए। इस समय रबी सीजन भी अपने निर्णायक पड़ाव पर है, ऐसे में नकद सहायता किसानों के लिए सीधे राहत का काम करेगी। शिवरात्रि जैसे बड़े पर्व से पहले किसानों के खातों में दो हजार रुपये की राशि पहुँचना एक सकारात्मक संकेत होगा, जो सरकार और किसानों के बीच भरोसे को और मजबूत करेगा।
फरवरी का महीना दोहरी खुशी का अवसर बनने की संभावना
फरवरी किसानों के लिए सिर्फ एक किस्त का महीना नहीं, बल्कि संभावनाओं से भरा समय साबित हो सकता है। पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त भी इसी महीने आने की संभावना जताई जा रही है। यदि इसमें देरी नहीं होती और मध्य प्रदेश सरकार भी सीएम किसान कल्याण योजना की 14वीं किस्त फरवरी के मध्य तक जारी कर देती है तो किसानों को कुल चार हजार रुपये प्राप्त होंगे। यह राशि खेती से जुड़े खर्च, खाद–बीज की जरूरतों और घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक सिद्ध होगी। इस दोहरी किस्त के मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नई गति आ सकती है।
किस्त में देरी के कारण और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ
पिछली बार पीएम किसान योजना का लाभ मिलने के तुरंत बाद सीएम किसान कल्याण योजना की किस्त भी जारी कर दी गई थी, परंतु इस बार देरी के कारण किसानों में कई तरह की अटकलें थीं। हालांकि, प्राप्त सूचनाओं के अनुसार यह देरी किसी नीति परिवर्तन या फंडिंग समस्या के कारण नहीं, बल्कि प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण हुई। किसानों की पात्रता की दोबारा जाँच, बैंक खातों का पुनः सत्यापन और बजट-पूर्व प्रक्रियाओं ने समय लिया, जिसकी वजह से भुगतान शेड्यूल प्रभावित हुआ।
बजट से पहले सरकार की प्राथमिकता और किसानों के प्रति प्रतिबद्धता
18 फरवरी को मध्य प्रदेश का बजट पेश होना है और इससे पहले किसानों को राहत राशि उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता मानी जा रही है। यह कदम न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि कृषि प्रधान राज्य में किसानों की स्थिरता और विश्वास बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। कृषि क्षेत्र किसी भी राज्य की आर्थिक संरचना की रीढ़ होता है और समय पर सहायता प्रदान करना सरकार की प्रतिबद्धता का संकेत है। राज्य सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के अंतर्गत योजनाओं के निरंतर कार्यान्वयन पर जोर दे रही है, और इसी क्रम में मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की आगामी किस्त की प्रतीक्षा अब अंत के करीब मानी जा रही है।
किसानों के लिए बढ़ती उम्मीदें और निकट भविष्य की संभावनाएँ
लगातार विलंब के बीच जो ताजा संकेत मिल रहे हैं, वे किसानों की उम्मीदों को फिर से मजबूत कर रहे हैं। जैसे-जैसे तिथि नजदीक आ रही है, किसानों में भरोसा बढ़ रहा है कि इस बार भी सरकार समय पर राहत देने में सफल होगी। रबी सीजन की स्थिति और आगामी बजट सत्र के मद्देनज़र यह किस्त किसानों के लिए बेहद उपयोगी होगी। अब सभी की निगाहें सरकार की ओर हैं, और जैसे ही आधिकारिक घोषणा होती है, लाखों किसानों के चेहरों पर राहत की चमक दिखाई देगी।
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