डिजिटल लेन-देन के तेजी से फैलते दायरे ने भुगतान को आसान तो बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर फ्रॉड की घटनाओं में भी लगातार वृद्धि हुई है। इसी चुनौती को देखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक ने अब एक स्पष्ट और प्रभावी मुआवजा व्यवस्था तैयार की है, जिसके तहत ऑनलाइन फ्रॉड की स्थिति में उपभोक्ताओं को 25,000 रुपये तक की राहत निश्चित रूप से मिल सकेगी। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक फ्रॉड के मामलों में मुआवजे को लेकर ऐसी निश्चित सीमा नहीं थी, जिसके कारण पीड़ितों को आर्थिक नुकसान से उबरने में मुश्किलें आती थीं।
फ्रॉड की स्थिति में कैसे मिलेगा मुआवजा
नए नियमों में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि कोई उपभोक्ता डिजिटल ठगी का शिकार होता है और समय पर बैंक या भुगतान प्रदाता को इसकी सूचना देता है, तो उसे हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी। मुआवजा 25,000 रुपये तक सीमित रहेगा, चाहे नुकसान उससे अधिक क्यों न हो। यह प्रावधान उपभोक्ता के समय पर रिपोर्ट करने पर निर्भर करेगा, जिससे बैंकिंग संस्थानों तक समय रहते जानकारी पहुंच सके और आगे की लेन-देन गतिविधियों को रोका जा सके। इससे डिजिटल भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता और जिम्मेदारी की भावना भी और मजबूत होगी।
पुराने नियमों की कमिया और नया सुधार
2017 के नियमों में अनाधिकृत लेन-देन के मामलों में उपभोक्ता की जिम्मेदारी तो सीमित थी, लेकिन मुआवजा निर्धारित न होने से उपभोक्ता भ्रम की स्थिति में रहता था। कई मामलों में पीड़ितों को नुकसान का पूरा बोझ खुद ही उठाना पड़ता था। नए ढांचे ने इस कमी को दूर करते हुए पहली बार स्पष्ट सीमा तय की है, जो उपभोक्ता को न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगी। इस परिवर्तन से डिजिटल भुगतान को लेकर उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा और वित्तीय प्रणाली की विश्वसनीयता भी सुदृढ़ होगी।
सीनियर सिटीजन के लिए अलग सुरक्षा ढांचा
RBI ने डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में वरिष्ठ नागरिकों को सबसे अधिक संवेदनशील वर्ग माना है। तकनीक से कम परिचित होने के कारण वे अक्सर साइबर अपराधियों का निशाना बनते हैं। इसीलिए उनके लिए अलग से सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने की दिशा में पहल की गई है। इस संबंध में जारी होने वाले चर्चा पत्र में बुजुर्गों के लिए विशेष लेन-देन सीमा, फेस आईडी या बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य करने और बिना फिजिकल उपस्थिति के भुगतान पर अतिरिक्त सुरक्षा लागू करने जैसे उपायों पर सुझाव मांगे जाएंगे। इन उपायों का उद्देश्य डिजिटल सुविधा को वरिष्ठ नागरिकों के लिए अधिक सुरक्षित और सुगम बनाना है।
डिजिटल इंडिया को मिलेगा नया भरोसा और गति
डिजिटल इंडिया का लक्ष्य केवल भुगतान को आसान बनाना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें देश का प्रत्येक उपभोक्ता स्वयं को सुरक्षित महसूस करे। साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों ने उपभोक्ताओं में चिंता जरूर बढ़ाई थी, लेकिन RBI का यह कदम डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रति विश्वास को नयी मजबूती देगा। सुरक्षित भुगतान व्यवस्था न केवल आम उपभोक्ता को भरोसा देती है, बल्कि पूरे डिजिटल इकोसिस्टम को स्थिर और टिकाऊ बनाती है। यह सुधार भारत की डिजिटल प्रगति को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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