मध्यप्रदेश में अब एक बार फिर जिला सरकार की वापसी हो रही है। जिले में कौन सा विकास कार्य पहले किया जाना है और कौन सा काम बाद में होगा, यह जिले में ही तय होगा। पूर्व की तरह जिला योजना समिति प्राथमिकताएं निर्धारित करेंगी। योजनाओं को अनुमोदित करने का अधिकार प्रभारी मंत्रियों को मिलेगा।
जिला योजना समिति की बैठक भी प्रत्येक तीन माह करनी होगी। इसमें जिले में चल रही योजनाओं की समीक्षा भी की जाएगी। समिति में 10 से लेकर 20 तक सदस्य रहेंगे। मोहन सरकार का गठन होने के बाद से जिला योजना समितियों की व्यवस्था ठप पड़ी थी।
प्रभारी मंत्री न होने के कारण कलेक्टर-कमिश्नर ही पूरा काम देख रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संभागीय मुख्यालयों पर समीक्षा बैठकें प्रारंभ करके जनप्रतिनिधियों को इससे जोड़ने का काम किया।
मध्यप्रदेश में अब एक बार फिर जिला सरकार की वापसी हो रही है। जिले में कौन सा विकास कार्य पहले किया जाना है और कौन सा काम बाद में होगा, यह जिले में ही तय होगा। पूर्व की तरह जिला योजना समिति प्राथमिकताएं निर्धारित करेंगी। योजनाओं को अनुमोदित करने का अधिकार प्रभारी मंत्रियों को मिलेगा।
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