देश में जारी एलपीजी संकट के बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है। 23 मार्च से राज्यों को पहले के मुकाबले 20% ज्यादा LPG सप्लाई दी जाएगी। इस बढ़ोतरी के बाद कुल सप्लाई प्री-क्राइसिस लेवल के करीब 50% तक पहुंच जाएगी।
मुख्य सचिवों को भेजा गया निर्देश
मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर नई व्यवस्था की जानकारी दी। इसमें साफ कहा गया है कि गैस वितरण में प्राथमिकता तय की जाए और जरूरी सेक्टरों को पहले सप्लाई दी जाए।
होटल, ढाबों और कैंटीन को प्राथमिकता
नई व्यवस्था के तहत रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल और इंडस्ट्रियल कैंटीन को सबसे पहले गैस दी जाएगी। गैस की कमी के चलते कई जगहों पर होटल-रेस्टोरेंट को लकड़ी और भट्टी पर खाना बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। सरकार का मकसद है कि फूड सर्विस सेक्टर पर असर कम किया जा सके।
फूड प्रोसेसिंग और डेयरी सेक्टर को राहत
अतिरिक्त गैस सप्लाई का फायदा फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और डेयरी इंडस्ट्री को भी मिलेगा। इसके साथ ही, सरकारी सस्ते कैंटीन और सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) को भी प्राथमिकता में शामिल किया गया है, ताकि आम लोगों को भोजन की उपलब्धता बनी रहे।
प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो सिलेंडर
मंत्रालय ने प्रवासी मजदूरों के लिए खास निर्देश जारी किए हैं। उन्हें 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडर प्राथमिकता से उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि उनके रोजमर्रा के भोजन पर असर न पड़े।
कालाबाजारी रोकने के सख्त निर्देश
राज्यों को यह भी निर्देश दिया गया है कि अतिरिक्त गैस की कालाबाजारी या गलत इस्तेमाल न हो। इसके लिए निगरानी बढ़ाने और सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है।
क्या है ‘प्री-क्राइसिस लेवल’?
प्री-क्राइसिस लेवल का मतलब उस समय से है जब देश में गैस की सप्लाई सामान्य थी। फिलहाल सप्लाई बहुत कम हो गई थी, जिसे अब बढ़ाकर पुराने स्तर के लगभग 50% तक किया जा रहा है।
मिडिल ईस्ट तनाव से प्रभावित सप्लाई
एलपीजी संकट की बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव है। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच संघर्ष के बाद सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई।
भारत की निर्भरता बनी बड़ी चुनौती
भारत अपनी LPG जरूरत का 60% से ज्यादा आयात करता है और करीब 80-85% सप्लाई इसी मार्ग से आती है। यही वजह है कि वैश्विक हालात का सीधा असर देश में गैस उपलब्धता पर पड़ा है।
अगले आदेश तक लागू रहेगी नई व्यवस्था
यह नई सप्लाई व्यवस्था 23 मार्च से लागू होगी और अगले आदेश तक जारी रहेगी। सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है और भविष्य में सप्लाई को 100% तक सामान्य करने की कोशिश की जाएगी।
ब्लैक मार्केटिंग से लोगों पर बोझ
एक सर्वे के मुताबिक, गैस की कमी के चलते करीब 20% लोग सिलेंडर ब्लैक में खरीदने को मजबूर हैं। इसके लिए उन्हें 4000 रुपये तक ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है, जो आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहा है।
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