मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर इंदौर से राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस अभियान का यह तीसरा वर्ष है। इस वर्ष यह अभियान 139 दिनों तक चलेगा, जिसमें प्रदेशभर में लगभग 2500 करोड़ रुपये के कार्य किए जाएंगे। यह अभियान गुड़ी पड़वा से गंगा दशमी तक चलेगा।
इस बार 2500 करोड़ रुपये के होंगे काम
उन्होंने कहा कि इस वर्ष जिन प्रमुख कार्यों को प्राथमिकता दी गई है, उनमें नए तालाबों का निर्माण, पुराने तालाबों का पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत, नहरों का निर्माण और सुधार, सूखी नदियों का पुनर्जीवन तथा भू-जल पुनर्भरण के लिए संरचनाओं का निर्माण शामिल हैं। प्रदेश के 10 हजार से अधिक चेक डेम और स्टॉप डेम के संधारण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। पेयजल की गुणवत्ता और स्वच्छता के कार्यों पर भी ध्यान दिया जाएगा। इन सभी कार्यों का उद्देश्य प्रदेश में वर्षा जल का अधिकतम संचयन करना और जल स्रोतों को स्थायी बनाना है। यह अभियान एक साथ प्रदेश के सभी 55 जिलों में क्रियान्वित होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के बिलावली, लिम्बोदी और छोटा सिरपुर तालाब के जीर्णोद्धार सहित जल संरक्षण एवं संवर्धन संबंधी लगभग 22 करोड़ रुपये के कार्यों का भूमिपूजन किया।
प्रदेशभर में लाखों जल संरचनाओं पर कार्य किया गया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में जल को पंचतत्वों में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि नदियां पृथ्वी की धमनियों की तरह हैं, जो जीवन प्रदान करती हैं। मध्यप्रदेश को नदियों का मायका बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां से 250 से अधिक नदियां निकलती हैं, जो न केवल प्रदेश बल्कि अन्य राज्यों को भी समृद्ध करती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण को राष्ट्रीय अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। पिछले वर्षों में प्रदेशभर में लाखों जल संरचनाओं पर कार्य किया गया है। इंदौर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अभियान के पूर्व वर्ष में इंदौर नगर निगम द्वारा बड़ी संख्या में पुरानी बावड़ियों और तालाबों के गहरीकरण और पुनरुद्धार का कार्य किया गया। साथ ही सैकड़ों कुओं का भी जीर्णोद्धार किया गया है। उन्होंने नागरिकों से जल संरक्षण में भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि यह अभियान केवल सरकारी नहीं, बल्कि जन-जन का आंदोलन होना चाहिए। उन्होंने नवरात्रि, गुड़ी पड़वा, विक्रम संवत् और अन्य पर्वों की मंगल कामनाएं देते हुए भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को बनाए रखने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विरासत से विकास’ के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सरकार इसी सोच और दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक ओर जहां समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विकास के नए आयाम स्थापित करते हुए आधारभूत संरचना, पर्यटन, कृषि, उद्योग और जनकल्याण के क्षेत्रों में तेज़ी से प्रगति की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य परंपरा और आधुनिकता के संतुलन के साथ प्रदेश को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को गौरवशाली विरासत के साथ बेहतर भविष्य भी मिल सके।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में हुई दुखद घटना का जिक्र करते हुए कहा कि आज की आधुनिक जीवनशैली में सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की भी आवश्यकता है, इस संबंध में उन्होंने नागरिकों से विशेष सुरक्षात्मक ऐहतियात बरतने की अपील की।
इंदौर में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार्मिक और पर्यावरणीय संदेशों से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियों में भी सहभागिता की। उन्होंने इस्कॉन मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजन-अर्चन किया तथा गौ माता की पूजा कर उन्हें गो-ग्रास भी खिलाया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उपस्थित नागरिकों को जल संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि जल केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है और इसके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निपानिया तालाब में विभिन्न पवित्र नदियों के जल का अर्पण भी किया।
जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह अवसर अत्यंत पवित्र है, जब नववर्ष की शुरुआत के साथ जल संरक्षण का संकल्प लिया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से प्रदेशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए इस अभियान को जन-जन से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “जल गंगा संवर्धन” केवल इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के जल संरक्षण का व्यापक अभियान है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं इस अभियान की शुरुआत करने पहुंचे हैं, जो इस संकल्प की गंभीरता और महत्व को दर्शाता है। मंत्री सिलावट ने कहा कि “जल है तो कल है” केवल एक नारा नहीं, बल्कि विकास और जीवन का आधार है। हमारी संस्कृति में जल का विशेष महत्व रहा है तालाब, कुएं, बावड़ियां और नदियां हमारी धरोहर हैं। इन्हें संरक्षित और पुनर्जीवित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
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