मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। मई-जून में होने वाले चुनाव में अब नया मोड़ तब आया है जब भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) ने भी उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर दिया है। राज्य में केवल एक विधायक होने के बावजूद पार्टी का यह फैसला सियासी समीकरणों को दिलचस्प बना रहा है।
राज्यसभा की तीन सीटों पर होगा चुनाव
मध्य प्रदेश में इस बार राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें दो सीटों पर बीजेपी की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, जबकि तीसरी सीट पर मुकाबला कड़ा हो सकता है। यही वजह है कि कांग्रेस के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण बनता दिख रहा है।
BAP पार्टी का बड़ा ऐलान
रतलाम जिले की सैलाना सीट से विधायक कमलेश्वर डोडियार ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी भी राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारेगी। डोडियार का कहना है कि आदिवासी मुद्दों को मजबूती से उठाने के लिए उनकी पार्टी उच्च सदन में अपनी मौजूदगी चाहती है। उन्होंने बीजेपी और कांग्रेस के विधायकों से भी समर्थन की अपील की है। डोडियार ने 19 मार्च 2026 को अपने आधिकारिक लेटरहेड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी और नेता प्रतिपक्ष सहित कई बड़े नेताओं को पत्र भेजे हैं। इन पत्रों में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आदिवासी पार्टी देशभर में आदिवासी समाज के अधिकार, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के लिए कार्य कर रही है और राज्यसभा में प्रतिनिधित्व चाहती है। पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पार्टी का प्रभाव राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में है, और संसद में प्रतिनिधि पहुंचने से आदिवासी मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी। उन्होंने सभी दलों से अपने विधायकों को BAP उम्मीदवार के समर्थन के निर्देश देने की अपील की है।
1 विधायक के दम पर कैसे उतरेगा उम्मीदवार?
राज्यसभा चुनाव लड़ने के लिए कम से कम 10 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। ऐसे में BAP के सामने सबसे बड़ा सवाल समर्थन जुटाने का है। डोडियार ने साफ किया है कि वे अन्य दलों के विधायकों से संपर्क करेंगे और आदिवासी प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर समर्थन मांगेंगे।
तीसरी सीट पर फंस सकता है पेंच
तीसरी सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। कांग्रेस को जीत के लिए 58 विधायकों की जरूरत है। हालांकि पार्टी के पास संख्या बल है, लेकिन कुछ परिस्थितियां समीकरण बिगाड़ सकती हैं।
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क्रॉस वोटिंग की आशंका
इन कारणों से कांग्रेस की स्थिति थोड़ी कमजोर नजर आ रही है।
क्रॉस वोटिंग से बढ़ी चिंता
हाल ही में हरियाणा, ओडिशा और बिहार में राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग देखने को मिली थी। ऐसे में मध्य प्रदेश में भी इसी तरह की स्थिति बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्यों अहम हो गया है BAP का फैसला?
अब तक BAP के एकमात्र विधायक का वोट निर्णायक माना जा रहा था, लेकिन पार्टी द्वारा अपना उम्मीदवार उतारने के ऐलान से समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। अगर BAP अन्य दलों के विधायकों को अपने पक्ष में करने में सफल होती है, तो मुकाबला और ज्यादा रोचक हो सकता है। मध्य प्रदेश का राज्यसभा चुनाव इस बार सीधा नहीं रहने वाला। बीजेपी जहां दो सीटों पर मजबूत दिख रही है, वहीं तीसरी सीट पर कांग्रेस और BAP के कारण मुकाबला त्रिकोणीय होने के संकेत हैं। आने वाले दिनों में समर्थन जुटाने की रणनीति ही तय करेगी कि किसके पक्ष में बाजी जाएगी।
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