मध्यप्रदेश के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर गुड़ी पड़वा का पर्व श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया गया। नवसंवत्सर के आगमन पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए।
नववर्ष का स्वागत, सूर्य को अर्घ्य
गुड़ी पड़वा के मौके पर पुजारियों ने कोटितीर्थ कुंड पर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर हिंदू नववर्ष का स्वागत किया। इसके बाद भगवान महाकाल का विधिवत अभिषेक किया गया, जिसमें नीम युक्त जल से स्नान कराकर पंचामृत से पूजन-अर्चन संपन्न हुआ।
नीम जल से स्नान की परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र माह ऋतु परिवर्तन का समय होता है, जब गर्मी की शुरुआत के साथ वात, पित्त और कफ से जुड़ी समस्याएं बढ़ती हैं। इसी कारण भगवान महाकाल को नीम के जल से स्नान कराया जाता है। आयुर्वेद में भी नीम को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। इस दिन नीम-मिश्री का प्रसाद भी भक्तों में वितरित किया जाता है, जिससे निरोगी जीवन का संदेश दिया जाता है।
भस्म आरती में विशेष शृंगार
गुरुवार तड़के भस्म आरती के दौरान मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जल, दूध, दही, घी और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। आरती के पश्चात बाबा को चांदी का मुकुट, रुद्राक्ष और पुष्पों की मालाएं पहनाई गईं। इस अवसर पर बाबा महाकाल का अनोखा शृंगार किया गया, जिसमें भांग और ड्रायफ्रूट से विशेष सजावट की गई। शृंगार के बाद ज्योतिर्लिंग को ढंककर भस्म अर्पित की गई और भोग लगाया गया।
शिखर पर लहराया नया ध्वज
गुड़ी पड़वा के शुभ दिन मंदिर के मुख्य शिखर पर नया ध्वज भी चढ़ाया गया, जो परंपरा और आस्था का प्रतीक माना जाता है।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का वातावरण देखने को मिला।
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