नई दिल्ली - मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी साथ लेकर आता है। इस मौसम में सबसे ज्यादा खतरा फूड पॉइजनिंग का रहता है। वातावरण में बढ़ी नमी और तापमान के कारण भोजन जल्दी खराब होने लगता है, जिससे बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी तेजी से पनपते हैं। ऐसे में अगर खाने-पीने में थोड़ी भी लापरवाही बरती जाए तो उल्टी, दस्त, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। यही वजह है कि हर साल बारिश के मौसम में अस्पतालों में फूड पॉइजनिंग के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है।
क्या है फूड पॉइजनिंग और क्यों बढ़ जाता है खतरा?
फूड पॉइजनिंग दूषित भोजन या पानी के सेवन से होने वाली एक सामान्य लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। जब भोजन में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या उनके विषैले तत्व शरीर में प्रवेश करते हैं तो कुछ घंटों या कुछ दिनों के भीतर संक्रमण के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। मानसून में नमी अधिक होने से खाद्य पदार्थ जल्दी खराब हो जाते हैं और यदि उन्हें लंबे समय तक खुले में रखा जाए या सही तरीके से न पकाया जाए तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
बारिश में किन चीजों से सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
बरसात के मौसम में सड़क किनारे खुले में बिकने वाला चाट, गोलगप्पे, कटे हुए फल, सलाद, खुले जूस, बासी भोजन और दूषित पानी सबसे अधिक जोखिम पैदा करते हैं। खुले में रखे खाद्य पदार्थों पर मक्खियां आसानी से बैठ जाती हैं, जो गंदगी से बैक्टीरिया उठाकर भोजन तक पहुंचा देती हैं। इसके अलावा अधपका मांस, मछली और अंडे भी संक्रमण का कारण बन सकते हैं। इसलिए इस मौसम में बाहर का खुला खाना खाने से बचना सबसे सुरक्षित माना जाता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
फूड पॉइजनिंग होने पर सबसे पहले उल्टी, दस्त, पेट में तेज दर्द या मरोड़, जी मिचलाना और बुखार जैसे लक्षण सामने आते हैं। कई लोगों में कमजोरी, चक्कर आना और शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है। यदि लगातार उल्टियां हो रही हों, दस्त में खून आ रहा हो, तेज बुखार बना रहे या डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत अस्पताल जाकर इलाज कराना चाहिए। समय पर उपचार न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को ज्यादा खतरा
फूड पॉइजनिंग का असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है, लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में यह संक्रमण जल्दी गंभीर रूप ले सकता है। इन लोगों में शरीर में पानी की कमी तेजी से होती है, जिससे अस्पताल में भर्ती होने की नौबत भी आ सकती है। इसलिए इन्हें खान-पान को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
ऐसे करें फूड पॉइजनिंग से बचाव
मानसून में हमेशा ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन ही खाना चाहिए। पीने के लिए साफ और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें तथा भोजन करने से पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह धोएं। बचे हुए भोजन को लंबे समय तक बाहर न रखें और जरूरत पड़ने पर फ्रिज में सुरक्षित रखें। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही खाएं। यदि बाहर खाना जरूरी हो तो केवल साफ-सुथरी और विश्वसनीय जगह का ही चुनाव करें।
बरसात में थोड़ी सी सावधानी बचा सकती है बड़ी परेशानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान खान-पान में बरती गई छोटी-सी सावधानी भी फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर समस्या से बचा सकती है। दूषित भोजन और गंदे पानी से दूरी बनाकर, स्वच्छता का ध्यान रखकर और ताजा भोजन का सेवन करके इस मौसम में स्वस्थ रहा जा सकता है।