दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में 10 अगस्त 2026 को आए 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। पश्चिमी कोलंबिया में आए इस भूकंप में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और हजारों लोग लापता बताए गए। कई शहरों में इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और बचाव अभियान लंबे समय तक जारी रहा। इस विनाशकारी घटना के बाद अब कैलिफोर्निया में संभावित बड़े भूकंप को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। भूभौतिक विज्ञानी स्टीफन बर्न्स ने कैलिफोर्निया को बड़े भूकंपीय खतरे वाले क्षेत्र के रूप में बताया है और कहा है कि यह इलाका भविष्य के बड़े झटके के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। उनकी टिप्पणी ने सोशल मीडिया और अमेरिकी मीडिया में नई बहस को जन्म दिया है।
‘सुपर ओवरड्यू’ बताने की वजह क्या है?
कैलिफोर्निया का नाम भूकंप के खतरे के संदर्भ में इसलिए बार-बार सामने आता है क्योंकि यहां कई सक्रिय भ्रंश रेखाएं मौजूद हैं। इनमें सैन एंड्रियास भ्रंश सबसे प्रसिद्ध है, जो प्रशांत और उत्तरी अमेरिकी प्लेटों के बीच की सीमा का एक प्रमुख हिस्सा है। इसके अलावा कैलिफोर्निया के अलग-अलग हिस्सों में सैन जैसिंटो, हेवर्ड और अन्य भ्रंश भी भूकंपीय गतिविधि के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण के अनुसार सैन एंड्रियास भ्रंश के कुछ हिस्सों में बड़े भूकंपों के बीच बीत चुका समय ऐतिहासिक औसत से अधिक है, इसलिए उन्हें बोलचाल में ‘ओवरड्यू’ कहा जाता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भूकंप अब निश्चित रूप से या जल्द ही आएगा।
क्या कोलंबिया के भूकंप से कैलिफोर्निया में खतरा बढ़ गया?
यही वह सवाल है जिस पर सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी एक देश में आए बड़े भूकंप को देखकर दूसरे महाद्वीप में निश्चित रूप से बड़े भूकंप की घोषणा नहीं की जा सकती। पृथ्वी की प्लेटों और भ्रंशों में तनाव का स्थानांतरण एक जटिल भूवैज्ञानिक प्रक्रिया है और इसके आधार पर किसी खास जगह पर आने वाले बड़े भूकंप का समय तय करना वर्तमान विज्ञान की क्षमता से बाहर है। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण स्पष्ट रूप से कहता है कि वैज्ञानिक किसी बड़े भूकंप की तारीख, स्थान और तीव्रता की सटीक भविष्यवाणी नहीं कर सकते। इसलिए कैलिफोर्निया के लिए सामने आई चेतावनी को संभावित जोखिम की चर्चा के रूप में देखना अधिक उचित है, न कि किसी निश्चित भविष्यवाणी के रूप में।
कैलिफोर्निया में ‘बिग वन’ की चिंता पुरानी है
कैलिफोर्निया में बड़े भूकंप की आशंका कोई नई बात नहीं है। सैन एंड्रियास भ्रंश से जुड़े ऐतिहासिक भूकंपों का अध्ययन वैज्ञानिक लंबे समय से कर रहे हैं। वर्ष 1906 में सैन फ्रांसिस्को के आसपास करीब 7.9 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था, जबकि 1857 में दक्षिणी सैन एंड्रियास भ्रंश क्षेत्र में फोर्ट तेजोन भूकंप भी बेहद शक्तिशाली था। वैज्ञानिक इन ऐतिहासिक घटनाओं और भूवैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर भविष्य के खतरे का आकलन करते हैं। हालांकि अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण यह भी स्पष्ट करता है कि भूकंप किसी घड़ी की तरह निश्चित अंतराल पर नहीं आते, इसलिए केवल पुराने अंतराल के आधार पर अगली घटना की तारीख बताना संभव नहीं है।
‘ओवरड्यू’ का मतलब जल्द आने वाला भूकंप नहीं
भूकंप विज्ञान में ‘ओवरड्यू’ शब्द को लेकर आम लोगों में अक्सर गलतफहमी पैदा हो जाती है। यदि किसी भ्रंश पर बड़े भूकंपों के बीच ऐतिहासिक औसत अंतराल पार हो जाए, तो वैज्ञानिक उस हिस्से को औसत के मुकाबले ‘ओवरड्यू’ कह सकते हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भूकंप की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण के अनुसार कुछ हिस्से औसत अंतराल से आगे निकल चुके हैं, फिर भी उपलब्ध आंकड़े यह नहीं बताते कि अगला भूकंप कब, कहां और कितनी तीव्रता का होगा। यही कारण है कि वैज्ञानिक निश्चित भविष्यवाणी के बजाय दीर्घकालिक संभावना और जोखिम के मॉडल तैयार करते हैं।
क्या कैलिफोर्निया में बहुत बड़ा ‘मेगा क्वेक’ आ सकता है?
कैलिफोर्निया में बड़े भूकंप की आशंका वास्तविक है, लेकिन इंटरनेट पर फैलने वाले ‘मेगा क्वेक’ के दावों को लेकर भी सावधानी जरूरी है। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण के अनुसार सैन एंड्रियास भ्रंश की लंबाई और गहराई को देखते हुए 9 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंप की संभावना बेहद कम है। वैज्ञानिक मॉडलों के अनुसार इस भ्रंश से करीब 8.3 तक की तीव्रता वाला भूकंप संभव माना जाता है, जबकि इससे बड़े भूकंप की संभावना अत्यंत कम है। इसलिए कैलिफोर्निया के लिए वास्तविक चिंता बड़े और विनाशकारी भूकंप से होने वाली क्षति है, न कि फिल्मों में दिखाए जाने वाले काल्पनिक महाभूकंप से।
भूकंप की भविष्यवाणी और अर्ली वार्निंग में बड़ा अंतर
कैलिफोर्निया में भूकंप से निपटने के लिए अर्ली वार्निंग व्यवस्था भी विकसित की गई है, लेकिन इसे भूकंप की भविष्यवाणी समझना गलत होगा। कैलिफोर्निया की आधिकारिक भूकंप चेतावनी प्रणाली के अनुसार सेंसर पहले भूकंप की तेज गति वाली पी-तरंगों को पहचानते हैं और उसके बाद चेतावनी जारी की जाती है, ताकि धीमी और अधिक नुकसान पहुंचाने वाली तरंगों के पहुंचने से पहले लोगों को कुछ सेकंड का समय मिल सके। इसका मतलब है कि चेतावनी भूकंप शुरू होने के बाद आती है, उससे पहले नहीं।
असली सबक डर नहीं, तैयारी है
कोलंबिया की हालिया त्रासदी और कैलिफोर्निया को लेकर सामने आई चेतावनी एक महत्वपूर्ण बात जरूर याद दिलाती है कि भूकंप का खतरा वास्तविक है और इसकी तैयारी पहले से होनी चाहिए। वैज्ञानिक किसी निश्चित तारीख की भविष्यवाणी नहीं कर सकते, लेकिन सक्रिय भ्रंशों, ऐतिहासिक भूकंपों और भूगर्भीय आंकड़ों के आधार पर जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है। सुरक्षित इमारतों का निर्माण, पुराने ढांचों को मजबूत करना, आपातकालीन किट तैयार रखना और भूकंप के दौरान सुरक्षित व्यवहार की जानकारी रखना नुकसान कम करने के सबसे प्रभावी उपायों में शामिल हैं। इसलिए कैलिफोर्निया के लिए सामने आई ‘बिग वन’ की चेतावनी को घबराहट के बजाय वैज्ञानिक जागरूकता और आपदा तैयारी के संकेत के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा।