वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सैन्य हमलों को रोकने के फैसले के कुछ ही दिनों बाद, ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर अचानक मिसाइल हमला कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मंगलवार को कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, अमेरिकी सुरक्षा तंत्र ने सभी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। इस घटना से सैन्य क्षति या किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
डिप्लोमेसी पर मंडराया खतरा और ट्रंप की चेतावनी
यह हमला ऐसे समय पर हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के रास्ते खुल रहे थे। इससे पहले शनिवार को अमेरिका ने ईरान के खिलाफ दो हफ्तों से जारी बमबारी रोक दी थी। हमलों से ठीक एक दिन पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि दोनों देशों के बीच "सकारात्मक बातचीत" हो रही है और समझौते की अच्छी संभावना है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया था कि यदि बातचीत विफल होती है, तो अमेरिकी सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू कर दी जाएगी। जॉर्डन के इसी बेस पर महीने की शुरुआत में हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए थे, जिसके बाद अमेरिका ने ईरान से जुड़े ठिकानों पर 13 दिनों तक आक्रामक हमले किए थे।
ट्रंप और नेतन्याहू की व्हाइट हाउस में अहम बैठक
मिसाइल हमले से कुछ ही घंटे पहले वाशिंगटन में राष्ट्रपति ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ओवल ऑफिस में डेढ़ घंटे की बंद कमरे में बैठक हुई। दोनों नेताओं ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की रणनीति पर चर्चा की। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट और इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू दोनों ने ही इस मुलाकात को "बेहद उत्पादक और सकारात्मक" करार दिया।
लाल सागर में हूती विद्रोहियों का हमला और इराक में संयुक्त कार्रवाई
मध्य पूर्व में जारी इस तनाव के बीच लाल सागर में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने एक सऊदी तेल टैंकर पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला करने का दावा किया है। हूती प्रवक्ता के अनुसार, टैंकर ने उनकी समुद्री नाकाबंदी के नियमों का उल्लंघन किया था। दूसरी तरफ, इराक में पिछले 72 घंटों के दौरान हुए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में अमेरिकी और सऊदी वायु सेना ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए पूर्वी इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के हथियार और लॉजिस्टिक ठिकानों को हवाई हमलों में नष्ट कर दिया है।