काठमांडू: नेपाल में देश की पहली आधुनिक रोड टनल नागढुंगा–सिस्नेखोला सुरंग का ट्रायल ऑपरेशन शुरू हो गया है। 24 अगस्त से इस सुरंग को निजी वाहनों के लिए भी खोल दिया गया है। फिलहाल कार, जीप और वैन जैसे अधिकतम 9 सीट वाले निजी वाहन सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक सुरंग से गुजर सकेंगे। ट्रायल के दौरान वाहनों से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है।
2.68 किलोमीटर लंबी सुरंग, सफर में बड़ी बचत
नागढुंगा–सिस्नेखोला सुरंग की लंबाई करीब 2.68 किलोमीटर है। इसका उद्देश्य काठमांडू घाटी को नेपाल के पश्चिमी हिस्सों से बेहतर तरीके से जोड़ना है। सुरंग शुरू होने से पहले जिस रास्ते पर पहाड़ी क्षेत्र के कारण काफी समय लगता था, वहां अब यात्रा का समय घटकर करीब 5 से 7 मिनट तक आने की उम्मीद है।
ट्रायल के दौरान सुरक्षा पर खास नजर
अधिकारियों ने सुरंग के भीतर वाहनों की गति 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक सीमित की है। वाहन चालकों के लिए हेडलाइट चालू रखना अनिवार्य है, जबकि सुरंग के अंदर रुकने और ओवरटेक करने पर रोक रहेगी। CCTV के जरिए पूरे मार्ग की निगरानी की जा रही है। ट्रायल के दौरान वाहन चालकों से मिले फीडबैक के आधार पर आगे संचालन व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा।
जापान की मदद से तैयार हुआ बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
यह परियोजना जापान की आधिकारिक विकास सहायता (ODA) के तहत तैयार की गई है। जापानी सहायता करीब 22.3 अरब येन की रही है। निर्माण के दौरान कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों और भारी बारिश से हुए भूस्खलन जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है नागढुंगा सुरंग?
नागढुंगा सुरंग सीधे भारत की सीमा से नहीं जुड़ती, लेकिन इसका महत्व भारत-नेपाल व्यापार के लिहाज से काफी बड़ा है। यह काठमांडू को पश्चिमी नेपाल और भारत की ओर जाने वाले महत्वपूर्ण परिवहन मार्गों से जोड़ने वाले कॉरिडोर का हिस्सा है। रिपोर्टों के मुताबिक, काठमांडू में आने वाले करीब 60-70 प्रतिशत माल इसी महत्वपूर्ण परिवहन नेटवर्क से होकर पहुंचता है।
भारत-नेपाल व्यापार को मिल सकता है फायदा
भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच बड़ी मात्रा में सामान सड़क मार्ग से आता-जाता है। ऐसे में नेपाल के भीतर सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने का असर सीमा पार व्यापार पर भी पड़ सकता है। खास तौर पर बीरगंज–रक्सौल जैसे प्रमुख भारत-नेपाल व्यापार मार्गों तक माल की आवाजाही को इससे अप्रत्यक्ष रूप से मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भारत के लिए बढ़ती कनेक्टिविटी की कड़ी
नागढुंगा सुरंग ऐसे समय में शुरू हुई है जब भारत और नेपाल के बीच परिवहन एवं व्यापार कनेक्टिविटी को लगातार मजबूत किया जा रहा है। जुलाई 2026 में भारत से नेपाल के लिए पहली सीधी वाणिज्यिक कंटेनर मालगाड़ी भी संचालित हुई, जिसने कोलकाता पोर्ट को नेपाल के बिराटनगर से सीधे जोड़ा। ऐसे में सड़क और रेल—दोनों स्तरों पर बेहतर कनेक्टिविटी दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई गति दे सकती है।
आगे बढ़ेगा सुरंग का संचालन
फिलहाल निजी वाहनों से ट्रायल शुरू किया गया है और अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती चरण का आकलन करने के बाद धीरे-धीरे अन्य श्रेणियों के वाहनों को भी अनुमति दी जाएगी। सुरंग की पूरी क्षमता से शुरुआत होने के बाद इसका असर काठमांडू की यातायात व्यवस्था, माल ढुलाई और पश्चिमी नेपाल से संपर्क पर दिखाई दे सकता है।