वॉशिंगटन: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 10 साल से अधिक समय बाद अमेरिका की राजकीय यात्रा पर पहुंचे हैं। बुधवार, 23 सितंबर को वह वॉशिंगटन के पास स्थित ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पहुंचे, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का इस तरह एयरपोर्ट पर व्यक्तिगत रूप से पहुंचना एक दुर्लभ प्रोटोकॉल कदम माना जाता है। ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप ने शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का स्वागत किया। इस दौरान रेड कार्पेट, सैन्य सम्मान और औपचारिक स्वागत की व्यवस्था की गई।
10 साल बाद अमेरिका पहुंचे शी जिनपिंग
शी जिनपिंग की मौजूदा यात्रा को अमेरिका-चीन संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, शी और पेंग लियुआन की पिछली व्हाइट हाउस यात्रा को एक दशक से ज्यादा समय हो चुका है। हालांकि शी नवंबर 2023 में सैन फ्रांसिस्को में आयोजित APEC कार्यक्रम के लिए अमेरिका आए थे, लेकिन मौजूदा दौरा उनकी औपचारिक राजकीय यात्रा है। शी 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका में रहेंगे। यह यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मई 2026 में चीन दौरे के बाद हो रही है। दोनों नेताओं की इस साल यह दूसरी सीधी मुलाकात है।
ट्रंप का एयरपोर्ट पहुंचना बना चर्चा का विषय
शी जिनपिंग के स्वागत के लिए ट्रंप का खुद ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पहुंचना इस यात्रा का सबसे खास पहलू रहा। अमेरिकी राष्ट्रपतियों द्वारा विदेशी नेताओं का एयरपोर्ट पर व्यक्तिगत स्वागत करना अब आम प्रथा नहीं है। ट्रंप के इस कदम को मई में चीन यात्रा के दौरान मिले औपचारिक और भव्य स्वागत के जवाब के तौर पर भी देखा जा रहा है। व्हाइट हाउस ने भी इसे दोनों नेताओं के बीच पारस्परिक आतिथ्य का हिस्सा बताया है। एयरपोर्ट पर ट्रंप और मेलानिया ने शी और पेंग लियुआन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के झंडे और सैन्य सम्मान के साथ स्वागत किया गया।
व्हाइट हाउस में भव्य स्वागत और स्टेट डिनर
शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान व्हाइट हाउस में कई औपचारिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गुरुवार को राष्ट्रपति ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप शी जिनपिंग और पेंग लियुआन के लिए स्टेट अराइवल सेरेमनी आयोजित करेंगे। इसके बाद दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच द्विपक्षीय बातचीत होगी। शाम को शी जिनपिंग के सम्मान में व्हाइट हाउस में औपचारिक स्टेट डिनर का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में अमेरिका की राजनीति, कारोबार और टेक्नोलॉजी क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इस पूरे कार्यक्रम को मई में ट्रंप को चीन में मिले औपचारिक स्वागत के जवाब के तौर पर भी देखा जा रहा है।
व्यापार और टैरिफ पर होगी अहम बातचीत
ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच बातचीत में व्यापार और टैरिफ का मुद्दा प्रमुख रहने की संभावना है। दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच लंबे समय से टैरिफ और व्यापार को लेकर तनाव रहा है। दोनों देशों ने व्यापारिक तनाव को कम करने के लिए पहले भी समझौते और अस्थायी व्यवस्थाएं की हैं। मौजूदा बैठक में दोनों पक्ष व्यापार संबंधों में स्थिरता बनाए रखने के तरीकों पर चर्चा कर सकते हैं। दुर्लभ खनिज यानी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई भी महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल है। अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक रिश्तों को लेकर यह बातचीत आगे की व्यापार नीति के लिए अहम हो सकती है।
AI और टेक्नोलॉजी की रेस पर भी नजर
अमेरिका और चीन के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर प्रतिस्पर्धा भी बातचीत का अहम हिस्सा रहने वाली है। दोनों देश AI, एडवांस्ड कंप्यूटिंग और दूसरी रणनीतिक तकनीकों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका की ओर से चीन को संवेदनशील तकनीक और चिप्स तक पहुंच को लेकर कई प्रतिबंध लगाए गए हैं। ऐसे में टेक्नोलॉजी और AI से जुड़े नियमों पर दोनों नेताओं के बीच चर्चा महत्वपूर्ण होगी। स्टेट डिनर में अमेरिका की प्रमुख टेक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के शामिल होने की भी उम्मीद है। इससे बैठक में टेक्नोलॉजी सेक्टर के महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है।
ताइवान और ईरान भी बातचीत के एजेंडे में
व्यापार और AI के अलावा ताइवान का मुद्दा भी दोनों नेताओं के बीच संवेदनशील विषय रहेगा। चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान के साथ अपने संबंधों को लेकर अलग नीति रखता है। इसके अलावा ईरान के साथ चीन के रणनीतिक संबंध और क्षेत्रीय स्थिति पर भी चर्चा होने की संभावना है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में अमेरिका-चीन संबंध सिर्फ द्विपक्षीय मुद्दों तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के फैसलों का असर वैश्विक व्यापार और सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। ऐसे में बैठक में कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों पक्ष अपना रुख रख सकते हैं।
मतभेदों के बीच रिश्तों में स्थिरता पर जोर
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक, ताइवान और भू-राजनीति जैसे कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। इसके बावजूद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधे संवाद को जारी रखने पर जोर दिया जा रहा है। चीन की ओर से भी अमेरिका के साथ संवाद बढ़ाने और मतभेदों को संभालने की बात कही गई है। ट्रंप और शी की इस साल दूसरी मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा के साथ आर्थिक निर्भरता भी बनी हुई है। मौजूदा यात्रा से किसी बड़े समझौते की तत्काल घोषणा होगी या नहीं, यह बातचीत के नतीजों पर निर्भर करेगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस मुलाकात के दौरान होने वाली वार्ता और उसके संभावित फैसलों पर है।