अधिकतर लोग नाक बंद होने को एक सामान्य और अस्थायी परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह समस्या बार-बार पेश आए तो यह शरीर में किसी गहरी गड़बड़ी का सूचक हो सकती है। नाक में सूजन, वायु प्रवाह में बाधा और लगातार जकड़न का असर सांस लेने पर पड़ता है, जिससे गले में खराश, सिर भारी लगना, थकान और नींद की गुणवत्ता खराब होने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कई बार यह स्थिति दूसरे संक्रमण या एलर्जी को भी जन्म देती है, इसलिए इसे बार-बार होने वाली साधारण तकलीफ कहकर टालना सही नहीं।
एलर्जी से लेकर साइनस तक: नाक बंद होने के प्रमुख कारण
नाक बंद होना केवल सर्दी का नतीजा नहीं, इसके अनेक चिकित्सीय और बाहरी कारण हो सकते हैं। एलर्जी इसके सबसे सामान्य कारणों में से एक है, जिसमें धूल, धुएं, परागकण या किसी खास पदार्थ के संपर्क में आते ही नाक की श्लैष्मिक झिल्ली में सूजन आ जाती है। कई बार साइनस संक्रमण टिशू में तरल भर देता है, जिससे नाक पूरी तरह जाम हो जाती है। नाक की हड्डी का टेढ़ा होना, किसी चोट के कारण उसका बढ़ना या टूटना, नेजल पॉलिप्स का बनना या रसायनों के अधिक संपर्क में आना भी लगातार जाम रहने की स्थितियों को जन्म देता है। गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव के कारण भी रक्त प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे नाक की नसों में सूजन आकर जकड़न महसूस हो सकती है।
कब बढ़ जाती है समस्या और किस तरह शरीर देता है संकेत
नाक बंद रहने की समस्या सामान्य संक्रमण में कुछ दिनों तक रहती है, लेकिन यदि यह बार-बार दोहराई जाए या लगातार बनी रहे तो यह क्रोनिक साइनस, गंभीर एलर्जी या संरचनात्मक समस्या की ओर संकेत कर सकती है। लगातार जकड़न कभी-कभी कानों में दर्द, आवाज में बदलाव, गंध महसूस न होने या सांस कम आने तक पहुंच सकती है। यह स्थिति नींद को बुरी तरह प्रभावित करती है और शरीर में ऑक्सीजन के स्तर पर भी असर डाल सकती है, जिससे थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है।
कैसे किया जाता है उपचार और किन स्थितियों में चाहिए विशेषज्ञ की सलाह
नाक बंद होने का उपचार इसकी वजह पर निर्भर करता है। सामान्य स्थिति में डॉक्टर सूजन कम करने वाली दवाएं, सिरप या भाप लेने की सलाह देते हैं। एलर्जी के मामलों में एंटी-एलर्जिक दवाएं उपयोगी साबित होती हैं, जबकि गंभीर साइनस संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक की जरूरत होती है। अगर जकड़न की वजह नाक की हड्डी का टेढ़ापन या नेजल पॉलिप्स है, तो विशेषज्ञ ENT डॉक्टर सर्जरी या विशेष प्रक्रिया द्वारा इसका इलाज कर सकते हैं। उपचार में देरी संक्रमण को बढ़ा सकती है, इसलिए लक्षणों की अवधि और गंभीरता पर ध्यान देना आवश्यक है।
किन बातों का ध्यान रखें और कब बने यह संकेत चेतावनी
धूल, प्रदूषण, मौसम बदलाव, ठंड-गर्मी का असंतुलन और बदबू जैसी अनेक चीजों से नाक की संवेदनशील नसें प्रभावित होती हैं, जिससे जकड़न का खतरा बढ़ जाता है। यदि साधारण एलर्जी है, तो भाप, गर्म पानी का सेवन और साफ वातावरण में रहने से राहत मिल सकती है। लेकिन यदि समस्या दो सप्ताह से अधिक बनी रहे, बार-बार दोहराई जाए या सांस लेने में कठिनाई पैदा करे, तो इसे हल्के में लेना खतरे को आमंत्रण देने जैसा है। समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने पर न केवल समस्या ठीक होती है, बल्कि इसके कारण बनने वाली बीमारियों को भी रोका जा सकता है।
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