गर्भावस्था के दौरान यात्रा की योजना बनाते समय महिलाओं के मन में यह स्वाभाविक सवाल उठता है कि विमान से सफर मां और गर्भस्थ शिशु के लिए सुरक्षित है या नहीं। सामान्य और जटिलतारहित गर्भावस्था में हवाई यात्रा अधिकांश महिलाओं के लिए संभव हो सकती है, लेकिन हर गर्भावस्था अलग होती है। इसलिए केवल सामान्य जानकारी के आधार पर यात्रा का निर्णय लेना उचित नहीं माना जाता। महिला की गर्भावस्था की अवधि, पूर्व चिकित्सकीय इतिहास, वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और यात्रा की अवधि जैसे कारक महत्वपूर्ण होते हैं। किसी भी तरह की परेशानी, पूर्व जटिलता या चिकित्सकीय जोखिम की स्थिति में स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।
14 से 28 सप्ताह का समय कई महिलाओं के लिए अधिक सुविधाजनक
गर्भावस्था के दौरान यात्रा के लिए दूसरा त्रैमासिक, अर्थात लगभग 14 से 28 सप्ताह के बीच का समय, कई महिलाओं के लिए अपेक्षाकृत अधिक सुविधाजनक हो सकता है। शुरुआती महीनों में मतली, उल्टी, अत्यधिक थकान और अन्य असहजताएं अधिक हो सकती हैं, जबकि अंतिम महीनों में शरीर का भार बढ़ने और प्रसव की तिथि नजदीक आने के कारण यात्रा कठिन हो सकती है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर महिला के लिए यही समय सबसे उपयुक्त होगा। यदि गर्भावस्था में कोई विशेष चिकित्सकीय स्थिति मौजूद है, तो यात्रा का निर्णय केवल सप्ताहों की संख्या देखकर नहीं किया जाना चाहिए।
कितने सप्ताह तक विमान से यात्रा की अनुमति मिल सकती है?
एकल और सामान्य गर्भावस्था की स्थिति में अनेक एयरलाइंस लगभग 36 सप्ताह तक यात्रा की अनुमति दे सकती हैं, लेकिन नियम एयरलाइन के अनुसार अलग-अलग होते हैं। कुछ एयरलाइंस गर्भावस्था के एक निश्चित चरण के बाद चिकित्सकीय प्रमाणपत्र मांग सकती हैं, जबकि जुड़वां या एक से अधिक गर्भस्थ शिशुओं की स्थिति में यात्रा की समय-सीमा और भी पहले हो सकती है। इसलिए टिकट खरीदने से पहले संबंधित एयरलाइन की गर्भवती यात्रियों से जुड़ी वर्तमान नीति की जांच करना जरूरी है। यात्रा के दिन केवल चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ होना पर्याप्त नहीं हो सकता, क्योंकि एयरलाइन की दस्तावेज संबंधी शर्तें भी लागू हो सकती हैं।
अंतिम महीनों में क्यों बढ़ सकती है सावधानी की जरूरत?
गर्भावस्था के अंतिम चरण में प्रसव की संभावना बढ़ने के कारण यात्रा को लेकर अतिरिक्त सावधानी आवश्यक हो सकती है। यदि उड़ान के दौरान प्रसव पीड़ा शुरू हो जाए या कोई चिकित्सकीय जटिलता उत्पन्न हो, तो विमान में तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा सीमित हो सकती है। इसी कारण एयरलाइंस भी गर्भावस्था के अंतिम सप्ताहों में यात्रा पर प्रतिबंध या अतिरिक्त प्रमाणपत्र की शर्त लगा सकती हैं। प्रसव की अनुमानित तिथि के करीब यात्रा करने से पहले यह देखना महत्वपूर्ण है कि गंतव्य पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है या नहीं और आकस्मिक स्थिति में तुरंत अस्पताल तक पहुंचने की व्यवस्था कितनी सहज है।
लंबी उड़ान में लगातार बैठे रहना परेशानी बढ़ा सकता है
कई घंटों की हवाई यात्रा में लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से पैरों में सूजन, अकड़न और असहजता हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं में रक्त के थक्के बनने का जोखिम भी बढ़ सकता है, इसलिए यात्रा के दौरान लंबे समय तक बिल्कुल स्थिर रहने से बचना उपयोगी हो सकता है। यदि चिकित्सक ने यात्रा की अनुमति दी हो और विमान में परिस्थितियां अनुकूल हों, तो समय-समय पर पैरों को हिलाना और आवश्यकता पड़ने पर थोड़ी देर चलना मददगार हो सकता है। पर्याप्त पानी पीना, आरामदायक कपड़े पहनना और यात्रा के दौरान शरीर की स्थिति पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है।
सीट बेल्ट लगाने का सही तरीका भी है जरूरी
गर्भावस्था में विमान की सीट बेल्ट लगाने को लेकर विशेष सावधानी रखनी चाहिए। सीट बेल्ट को पेट के ऊपर रखने के बजाय कूल्हों और पेट के नीचे की ओर सही ढंग से लगाना अधिक सुरक्षित माना जाता है। बेल्ट बहुत ढीली भी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि अचानक झटके या वायु-अशांति की स्थिति में चोट लगने का जोखिम हो सकता है। विमान यात्रा के दौरान सीट बेल्ट संबंधी निर्देशों का पालन करना आवश्यक है। यदि बेल्ट लगाने की स्थिति या यात्रा के दौरान किसी शारीरिक परेशानी को लेकर संदेह हो, तो विमान कर्मियों से सहायता ली जा सकती है।
किन स्थितियों में डॉक्टर की सलाह के बिना यात्रा नहीं करनी चाहिए?
यदि गर्भावस्था के दौरान रक्तस्राव, समय से पहले प्रसव का खतरा, उच्च रक्तचाप, प्रीक्लेम्पसिया, प्लेसेंटा से जुड़ी समस्या या कोई अन्य जटिलता है, तो बिना चिकित्सकीय सलाह के हवाई यात्रा करना उचित नहीं है। कुछ महिलाओं में पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं भी यात्रा के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में चिकित्सक महिला की वर्तमान जांच, गर्भावस्था की अवस्था और संभावित जोखिमों का आकलन करके ही यात्रा के संबंध में सलाह दे सकते हैं। यदि यात्रा के दौरान पेट में तेज दर्द, रक्तस्राव, सांस लेने में परेशानी या कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
उड़ान से पहले डॉक्टर और एयरलाइन, दोनों से जानकारी लेना जरूरी
गर्भावस्था में हवाई यात्रा की तैयारी केवल टिकट बुक करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यात्रा से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से स्वास्थ्य स्थिति पर चर्चा करना और संबंधित एयरलाइन की गर्भवती यात्रियों से जुड़ी ताजा नीति देखना आवश्यक है। विशेष रूप से गर्भावस्था के अंतिम चरण में चिकित्सकीय प्रमाणपत्र, गर्भावस्था के सप्ताह और प्रसव की अनुमानित तिथि से संबंधित दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। नियमों में बदलाव संभव है, इसलिए यात्रा की तारीख के निकट एक बार फिर एयरलाइन से जानकारी की पुष्टि करना बेहतर रहता है।
सुरक्षित यात्रा का आधार है व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति
गर्भावस्था में हवाई यात्रा को लेकर कोई एक नियम हर महिला पर लागू नहीं किया जा सकता। किसी महिला के लिए सामान्य और सुरक्षित यात्रा दूसरी महिला के लिए चिकित्सकीय जोखिम पैदा कर सकती है। इसलिए यात्रा का निर्णय गर्भावस्था की प्रगति, चिकित्सकीय इतिहास, वर्तमान लक्षण और विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर होना चाहिए। यदि गर्भावस्था सामान्य है और डॉक्टर यात्रा की अनुमति देते हैं, तो आवश्यक सावधानियों के साथ विमान यात्रा की जा सकती है। वहीं, जोखिम के संकेत होने पर यात्रा को टालना मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की सुरक्षा के लिए बेहतर निर्णय हो सकता है।