यदि कोई व्यक्ति आपकी निजी या अंतरंग तस्वीरें सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसे, उपहार, व्यक्तिगत मुलाकात या किसी अन्य तरह का फायदा मांग रहा है, तो सबसे पहले खुद को दोषी मानने या घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में दबाव में आकर मांग पूरी करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता और कई मामलों में आरोपी आगे और अधिक पैसे या तस्वीरों की मांग कर सकता है। इसलिए बातचीत को भावनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय व्यवस्थित तरीके से संभालना जरूरी है। धमकी देने वाले व्यक्ति से अतिरिक्त तस्वीरें या वीडियो बिल्कुल साझा न करें और संभव हो तो उसके साथ अनावश्यक बातचीत बढ़ाने से बचें।
सबसे पहले सभी डिजिटल सबूत सुरक्षित करें
शिकायत करने से पहले उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना बेहद महत्वपूर्ण है। धमकी वाले संदेश, बातचीत, फोन नंबर, उपयोगकर्ता नाम, प्रोफाइल का पता, ईमेल, भुगतान की मांग, बैंक खाते या भुगतान माध्यम से जुड़ी जानकारी और भेजे गए लिंक के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। चैट या संदेशों को जल्दबाजी में मिटाने से बचें, क्योंकि बाद में यही सामग्री जांच में उपयोगी हो सकती है। यदि संभव हो तो संबंधित बातचीत का मूल रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखें और तारीख तथा समय की जानकारी नोट कर लें, ताकि घटनाक्रम को स्पष्ट रूप से समझाया जा सके।
राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज करें शिकायत
भारत में साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से की जा सकती है। शिकायत में घटना का पूरा विवरण देने के साथ आरोपी से संबंधित उपलब्ध जानकारी भी दर्ज करना उपयोगी रहेगा। गृह मंत्रालय के नागरिक मार्गदर्शक के अनुसार पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों को संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की पुलिस आवश्यक कार्रवाई के लिए देखती है। इसलिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के साथ गंभीर या तत्काल खतरे की स्थिति में नजदीकी पुलिस थाने अथवा साइबर अपराध प्रकोष्ठ से संपर्क करना भी उचित है।
1930 पर तुरंत संपर्क करें, खासकर पैसे चले गए हों तो
यदि ब्लैकमेलर की मांग पूरी करते हुए आपने पैसे भेज दिए हैं, तो समय गंवाए बिना साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना महत्वपूर्ण है। बैंक खाते, भुगतान आवेदन, लेनदेन संख्या, प्राप्तकर्ता की जानकारी और भुगतान से संबंधित संदेशों को सुरक्षित रखें, क्योंकि वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में शुरुआती कार्रवाई महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि अभी तक कोई पैसा नहीं भेजा गया है, तब भी केवल इसलिए शिकायत टालने की जरूरत नहीं है कि आर्थिक नुकसान नहीं हुआ। निजी तस्वीरों को सार्वजनिक करने की धमकी अपने आप में गंभीर मामला है और उपलब्ध साक्ष्यों के साथ इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए।
तस्वीरें इंटरनेट पर पहुंच गई हों तो तत्काल मंच पर रिपोर्ट करें
यदि आरोपी ने तस्वीरें किसी सामाजिक मंच, संदेश सेवा, वेबसाइट या अन्य ऑनलाइन माध्यम पर पहले ही डाल दी हैं, तो संबंधित मंच के रिपोर्टिंग विकल्प का इस्तेमाल तुरंत करें। जिस पोस्ट, खाते या सामग्री से तस्वीरें प्रसारित हो रही हैं, उसका प्रमाण सुरक्षित रखने के बाद उसे मंच की नीति के तहत रिपोर्ट किया जा सकता है। तस्वीरें अलग-अलग जगहों पर दिखाई दे रही हों तो प्रत्येक संबंधित मंच पर शिकायत करना उपयोगी रहेगा। साथ ही, किसी मित्र या परिचित को तस्वीरें आगे भेजने के बजाय केवल आवश्यक साक्ष्य सुरक्षित रखें, क्योंकि सामग्री को दोबारा प्रसारित करने से उसका प्रसार और बढ़ सकता है।
वयस्क पीड़ितों के लिए StopNCII.org भी उपयोगी विकल्प
यदि निजी तस्वीरें अंतरंग प्रकृति की हैं और तस्वीर में दिखाई देने वाला व्यक्ति उस समय 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र का था, तो StopNCII.org एक उपयोगी रोकथाम उपकरण हो सकता है। यह निःशुल्क सेवा तस्वीर या वीडियो को सीधे उपकरण पर संसाधित करके उसका विशिष्ट हैश, यानी डिजिटल फिंगरप्रिंट, तैयार करती है। मूल तस्वीर StopNCII.org को अपलोड नहीं की जाती; साझा किया जाने वाला मुख्य तकनीकी संकेत उसका हैश होता है। भागीदार मंच इस हैश का मिलान कर ऐसी सामग्री की पहचान कर सकते हैं और अपनी नीतियों के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं।
StopNCII.org पूरे इंटरनेट से तस्वीरें नहीं हटा सकता
यह समझना भी जरूरी है कि StopNCII.org पूरे इंटरनेट से किसी तस्वीर को हटाने की गारंटी नहीं देता। इसकी तकनीक केवल भागीदारी करने वाले मंचों पर काम करती है और वहां भी कार्रवाई संबंधित मंच की नीति तथा उसके जांच तंत्र पर निर्भर करती है। सेवा के अनुसार तस्वीर या वीडियो आपके उपकरण से बाहर नहीं जाता और उसी उपकरण पर उसका हैश तैयार किया जाता है। इसलिए यह शिकायत दर्ज कराने का विकल्प नहीं बल्कि तस्वीरों के संभावित प्रसार को रोकने में मदद करने वाला अतिरिक्त सुरक्षा उपाय है।
आरोपी को पैसे देना क्यों नहीं है सही रास्ता
ब्लैकमेलिंग की स्थिति में सबसे बड़ी गलती यह हो सकती है कि पीड़ित डर के कारण आरोपी की हर मांग पूरी करने लगे। एक बार भुगतान करने के बाद भी यह जरूरी नहीं कि आरोपी तस्वीरें मिटा दे या आगे कोई मांग न करे। कई मामलों में भुगतान को इस बात के संकेत के रूप में देखा जा सकता है कि पीड़ित दबाव में आ सकता है। इसलिए आर्थिक लेनदेन करने के बजाय भुगतान की मांग से जुड़े सभी प्रमाण सुरक्षित रखना और उसे संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना अधिक सुरक्षित तरीका है। यदि पहले ही भुगतान हो चुका है, तो शर्म या डर के कारण घटना छिपाने के बजाय तुरंत शिकायत करना चाहिए।
परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति को बताना भी जरूरी
ऐसी घटना के बाद पीड़ित अक्सर सामाजिक बदनामी या परिवार की प्रतिक्रिया के डर से पूरी स्थिति अकेले संभालने की कोशिश करता है। लेकिन मानसिक दबाव के कारण निर्णय लेना कठिन हो सकता है। किसी भरोसेमंद व्यक्ति को घटना की जानकारी देने से शिकायत दर्ज कराने, डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने और आगे की कार्रवाई में सहायता मिल सकती है। यदि आरोपी शारीरिक नुकसान, पीछा करने या जबरन मिलने की धमकी भी दे रहा है, तो ऑनलाइन शिकायत के साथ स्थानीय पुलिस से तत्काल संपर्क करना अधिक जरूरी हो जाता है।
कानूनी सहायता लेने में संकोच न करें
निजी तस्वीरों की बिना सहमति साझेदारी और उससे जुड़ी धमकी को केवल निजी विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग कानून और आपराधिक प्रावधान लागू हो सकते हैं, इसलिए मामले की वास्तविक स्थिति के अनुसार कानूनी सलाह लेना बेहतर रहेगा। शिकायत करते समय घटना का क्रम, आरोपी की पहचान से जुड़ी जानकारी, धमकी के संदेश, भुगतान की मांग और ऑनलाइन प्रसार के प्रमाण उपलब्ध कराने से जांच एजेंसियों को मामले को समझने में मदद मिल सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पीड़ित को दोषी नहीं माना जाना चाहिए; बिना सहमति निजी सामग्री का प्रसार या उसके नाम पर धमकी देना जिम्मेदारी आरोपी की है।