भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कोलार क्षेत्र की रहने वाली डेढ़ वर्षीय धृति शुक्ला ने अपनी शारीरिक लचक और योग क्षमता से लोगों को हैरान कर दिया है। इतनी कम उम्र में कई योग आसनों और फ्लेक्सिबिलिटी पोज का प्रदर्शन करने वाली धृति को अंतरराष्ट्रीय संस्था बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से सम्मानित किया गया है। संस्था ने उन्हें ‘यंगेस्ट चाइल्ड टू डेमोंस्ट्रेट मल्टीपल योग आसन एंड फ्लेक्सिबिलिटी पोज’ के खिताब से नवाजा है।
धृति की उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि सामान्य तौर पर योग के कठिन आसनों के लिए लंबे समय तक अभ्यास, शारीरिक नियंत्रण और संतुलन की आवश्यकता होती है। ऐसे में इतनी छोटी उम्र में धृति द्वारा इन गतिविधियों का प्रदर्शन करना उनके परिवार के साथ-साथ भोपाल के लिए भी गौरव का विषय बन गया है।
प्रतिभा के साथ अभ्यास ने बनाया रिकॉर्ड का रास्ता
धृति शुक्ला ने जिस उम्र में विश्व रिकॉर्ड की पहचान हासिल की है, उस उम्र में अधिकांश बच्चे अभी अपने आसपास की दुनिया को समझने और बुनियादी शारीरिक गतिविधियां सीखने के दौर में होते हैं। धृति ने इसी उम्र में योग के विभिन्न आसनों और शरीर के लचीलेपन से जुड़े अभ्यासों में अपनी विशेष क्षमता दिखाई।
उनके प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि बच्चों में मौजूद स्वाभाविक शारीरिक लचक और उनकी रुचि को यदि सही दिशा और सुरक्षित तरीके से विकसित किया जाए तो कम उम्र में भी असाधारण प्रतिभा सामने आ सकती है। धृति की उपलब्धि ने परिवार और आसपास के लोगों के बीच भी उत्साह पैदा किया है।
मां ने पहचानी बेटी की योग प्रतिभा
धृति की इस उपलब्धि के पीछे उनकी मां डॉ. प्राची शुक्ला की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। डॉ. प्राची स्वयं योग शिक्षिका हैं और उन्होंने बेटी की सहज रुचि को पहचानते हुए उसके अभ्यास को दिशा दी। उन्होंने धृति की क्षमता को विकसित करने में निरंतर मार्गदर्शन दिया और योग के प्रति उसकी रुचि को प्रोत्साहित किया।
डॉ. प्राची के अनुसार धृति में योग के प्रति रुचि स्वाभाविक रूप से दिखाई देने लगी थी। इसी रुचि को ध्यान में रखते हुए उन्होंने बेटी के अभ्यास को आगे बढ़ाया। मां और बेटी की इस साझी मेहनत का परिणाम अब अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड के रूप में सामने आया है।
भोपाल की नन्ही बेटी ने बढ़ाया मध्य प्रदेश का मान
धृति शुक्ला की उपलब्धि को भोपाल और मध्य प्रदेश के लिए भी खास उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। एक छोटे बच्चे द्वारा अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराना परिवार के लिए गर्व के साथ-साथ शहर के लिए भी खुशी का अवसर है।
धृति की कहानी यह संदेश देती है कि प्रतिभा के लिए उम्र कोई निश्चित सीमा नहीं होती। हालांकि बच्चों के शारीरिक अभ्यास में उनकी उम्र, क्षमता और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। योग जैसे अभ्यासों में प्रशिक्षित मार्गदर्शन के साथ ही बच्चों की प्राकृतिक क्षमता को विकसित करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
आगे भी रिकॉर्ड बनाने की तैयारी
धृति की मां डॉ. प्राची शुक्ला ने संकेत दिया है कि यह उपलब्धि उनके लिए अंतिम पड़ाव नहीं है। धृति की प्रतिभा और योग के प्रति उसकी रुचि को देखते हुए आने वाले समय में उसे अन्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड के लिए भी नामांकित करने की तैयारी की जाएगी।
डेढ़ वर्ष की उम्र में मिली यह पहचान धृति के लिए अभी शुरुआत है। आने वाले वर्षों में यदि उसकी योग प्रतिभा को सुरक्षित, संतुलित और प्रशिक्षित तरीके से आगे बढ़ाया जाता है, तो वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी अलग पहचान बना सकती है। फिलहाल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज यह उपलब्धि भोपाल की इस नन्ही योग प्रतिभा के लिए यादगार शुरुआत बन गई है।