भोपाल. राज्यसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निवास पर एक महत्वपूर्ण डिनर बैठक आयोजित की। इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों ने हिस्सा लिया तथा आगामी मतदान को लेकर विस्तृत रणनीति पर चर्चा की। कांग्रेस का पूरा फोकस अपनी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की जीत सुनिश्चित करने पर है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मौजूदा संख्या बल को देखते हुए कांग्रेस किसी भी प्रकार की चूक या असंतोष की संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहती, इसलिए संगठनात्मक स्तर पर लगातार संवाद और समन्वय की प्रक्रिया चल रही है।
क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं ने बढ़ाई कांग्रेस की चिंता
राज्यसभा चुनाव में अक्सर क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक समीकरणों के अचानक बदलने की घटनाएं देखने को मिलती रही हैं। इसी वजह से कांग्रेस नेतृत्व अपने विधायकों को लेकर अतिरिक्त सतर्क नजर आ रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि कुछ विधायकों पर दूसरे दलों की नजर बनी हुई है। हालांकि कांग्रेस सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी संभावना को स्वीकार नहीं कर रही, लेकिन पार्टी की गतिविधियां यह संकेत जरूर दे रही हैं कि वह किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से बचने के लिए पहले से तैयारी कर रही है। यही कारण है कि विधायकों को एक साथ रखने और निरंतर संपर्क में बनाए रखने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
हिमाचल से बेंगलुरु तक, बदली गई राजनीतिक रणनीति
सूत्रों के अनुसार शुरुआती दौर में कांग्रेस अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश ले जाने पर विचार कर रही थी, लेकिन बाद में योजना में बदलाव करते हुए कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु को प्राथमिकता दी गई। बताया जा रहा है कि विधायकों को विशेष विमान के जरिए वहां भेजने की तैयारी की जा रही है। राजनीतिक दृष्टि से यह कदम ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका इस्तेमाल विभिन्न दल महत्वपूर्ण मतदान से पहले अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए करते रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
जयवर्धन सिंह ने जताया पूर्ण विश्वास
बैठक के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने भरोसा जताया कि पार्टी के सभी 62 विधायक एकजुट होकर कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में पार्टी पूरी मजबूती के साथ मैदान में है और सभी विधायक संगठन के निर्णय का सम्मान करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मीनाक्षी नटराजन इस चुनाव में मैदान में उतरी एकमात्र महिला उम्मीदवार हैं और उनका राज्यसभा पहुंचना महिलाओं के प्रतिनिधित्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा।
महिला प्रतिनिधित्व को बनाया जा रहा प्रमुख मुद्दा
कांग्रेस नेतृत्व इस चुनाव में महिला प्रतिनिधित्व के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्यसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। इसी संदर्भ में मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी को कांग्रेस एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक संदेश के रूप में प्रस्तुत कर रही है। पार्टी का तर्क है कि अनुभवी महिला नेतृत्व को संसद के उच्च सदन में अवसर मिलना मध्य प्रदेश और देश दोनों के लिए लाभकारी होगा।
मतदान से पहले विधायकों की निगरानी और समन्वय पर जोर
बैठक के बाद उमंग सिंघार ने संकेत दिया कि पार्टी मतदान प्रक्रिया को लेकर अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे रही है। कांग्रेस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मतदान के दिन सभी विधायक निर्धारित योजना के अनुसार मतदान करें और किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। इसके लिए विधायकों के बीच लगातार संवाद, समन्वय और संगठनात्मक बैठकों का सिलसिला जारी रखा जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष जनमत का चुनाव न हो, लेकिन इसके परिणाम कई बार बड़े राजनीतिक संदेश देने का काम करते हैं।
राज्यसभा चुनाव ने बढ़ाई प्रदेश की सियासी सरगर्मी
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव ने एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक सक्रियता को तेज कर दिया है। एक ओर कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने की कवायद में जुटी है, तो दूसरी ओर भाजपा भी चुनावी गणित को अपने पक्ष में साधने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में विधायकों की गतिविधियों, राजनीतिक बैठकों और दलों की रणनीतियों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। फिलहाल इतना तय है कि राज्यसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में सस्पेंस और रणनीतिक चालों का दौर तेज हो चुका है।