दतिया. पिछले कुछ समय से दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की संभावना को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज थीं। विभिन्न दलों ने भी संभावित चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियां शुरू कर दी थीं। हालांकि चुनाव आयोग द्वारा जारी नवीनतम अधिसूचना में दतिया सीट का उल्लेख नहीं होने से यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल यहां उपचुनाव कराने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इस फैसले ने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित किया है।
विधायक की सदस्यता रद्द होने से खाली हुई थी सीट
दतिया विधानसभा सीट अप्रैल 2026 में उस समय रिक्त हुई थी जब कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त कर दी गई थी। उन्हें एक पुराने धोखाधड़ी प्रकरण में तीन वर्ष की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई। सीट रिक्त होने के बाद उपचुनाव की संभावनाएं बढ़ गई थीं और राजनीतिक दल सक्रिय हो गए थे।
दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है मामला
राजेंद्र भारती ने अपनी सजा और सदस्यता समाप्त किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है और अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 14 जुलाई 2026 की तारीख निर्धारित की है। जब तक इस मामले में अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं आ जाता, तब तक सीट की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा रही है।
कानूनी अनिश्चितता बनी टलने की वजह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव आयोग ने कानूनी स्थिति स्पष्ट न होने के कारण उपचुनाव की घोषणा से परहेज किया है। यदि न्यायालय का फैसला राजेंद्र भारती के पक्ष में आता है तो राजनीतिक और संवैधानिक परिस्थितियां बदल सकती हैं। ऐसे में आयोग किसी संभावित जटिलता से बचने के लिए फिलहाल इंतजार की रणनीति अपना रहा है।
सुनवाई टलने से बढ़ी राजनीतिक प्रतीक्षा
हाल ही में प्रस्तावित सुनवाई के दौरान राजेंद्र भारती की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के न्यायालय में देर से पहुंचने के कारण मामला निर्धारित समय पर सूचीबद्ध नहीं हो सका। परिणामस्वरूप सुनवाई स्थगित कर 14 जुलाई की नई तारीख तय कर दी गई। इस घटनाक्रम ने दतिया के राजनीतिक भविष्य को लेकर अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।
जुलाई के फैसले पर टिकी हैं राजनीतिक निगाहें
अब दतिया विधानसभा सीट का भविष्य काफी हद तक 14 जुलाई को होने वाली सुनवाई और उसके बाद आने वाले न्यायिक निर्णय पर निर्भर करेगा। अदालत के फैसले के बाद ही यह तय हो सकेगा कि सीट पर उपचुनाव होगा या फिर कोई अन्य संवैधानिक स्थिति बनेगी। फिलहाल दतिया की राजनीति में प्रतीक्षा और संभावनाओं का दौर जारी है।