इंदौर: धार की ऐतिहासिक भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में अब निर्णायक मोड़ आ गया है। सोमवार को इंदौर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा पेश की गई वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट पर कड़ा ऐतराज जताया है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए इसे एकतरफा करार दिया है।
ASI की रिपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और शोभा मेनन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि एएसआई की पूरी रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण है। वकीलों ने कोर्ट में कहा कि सर्वे के दौरान कई प्रक्रियात्मक खामियां (Procedural Lapses) रहीं और रिपोर्ट में दिए गए निष्कर्षों का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है।
‘मंदिर’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति
मुस्लिम पक्ष (मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी) ने विशेष रूप से रिपोर्ट में इस्तेमाल की गई शब्दावली पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि एएसआई ने बिना किसी ऐतिहासिक पुख्ता प्रमाण के परिसर के लिए "भोजशाला मंदिर" शब्द का उपयोग किया है। मुस्लिम पक्ष के अनुसार, रिपोर्ट को इस तरह तैयार किया गया है जिससे हिंदू पक्ष के दावों को बल मिले।
मंदिर, मस्जिद या जैन शाला? संशय बरकरार
बहस के दौरान एक और महत्वपूर्ण बिंदु उठाया गया कि विवादित परिसर का वास्तविक स्वरूप अभी तक स्पष्ट नहीं है। मुस्लिम पक्ष ने सवाल किया कि क्या यह मंदिर है, मस्जिद है या फिर जैन शाला? उन्होंने तर्क दिया कि यदि यह मंदिर होता तो वहां मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा के प्रमाण मिलते, जो कि फिलहाल नहीं हैं। साथ ही, यह भी दलील दी गई कि संपत्ति के स्वामित्व का निर्णय लेना सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र है।
क्या है मामला?
उल्लेखनीय है कि साल 2022 में 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' ने याचिका दाखिल कर भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को स्पष्ट करने और परिसर का आधिपत्य हिंदू समाज को देने की मांग की थी। इसी याचिका पर हाईकोर्ट ने एएसआई को वैज्ञानिक सर्वे करने के आदेश दिए थे।
आज होगी अंतिम बहस
सोमवार को मुस्लिम पक्ष की दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने मामले की अगली कार्यवाही मंगलवार के लिए तय की है। आज इस संवेदनशील मामले पर अंतिम बहस (Final Arguments) होनी है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।