डिंडोरी: डिंडोरी जिले में स्वास्थ्य विभाग की सरकारी राशि के कथित गबन और अनियमित भुगतान का मामला सामने आया है। भोपाल स्थित आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) मुख्यालय को डिंडोरी स्वास्थ्य विभाग में सरकारी राशि के कथित गबन की जानकारी मिली थी। इसके बाद शिकायत की जांच की गई। जांच के आधार पर तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) सहित छह अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मामले में करीब 60.60 लाख रुपये के कथित अनियमित भुगतान का आरोप है। जांच एजेंसी के अनुसार, अप्रैल 2016 से दिसंबर 2025 के बीच IFMIS पोर्टल के जरिए वेतन, एरियर और अन्य भत्तों के भुगतान में गड़बड़ी की आशंका सामने आई है।
भोपाल EOW मुख्यालय को मिली थी गड़बड़ी की जानकारी
डिंडोरी स्वास्थ्य विभाग में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जानकारी भोपाल स्थित EOW मुख्यालय तक पहुंची थी। इसके बाद मामले से जुड़ी शिकायत की जांच की गई। जांच के दौरान सरकारी राशि के भुगतान और विभागीय रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं से संबंधित तथ्य सामने आए।EOW की जांच के आधार पर इस मामले में अपराध क्रमांक 109/2026 दर्ज किया गया है। एजेंसी अब भुगतान से जुड़े दस्तावेजों, IFMIS पोर्टल की प्रविष्टियों और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है।
तत्कालीन CMHO समेत 6 लोगों के खिलाफ FIR
EOW के प्रेस नोट के अनुसार, मामले में तत्कालीन CMHO डॉ. आर. के. मेहरा, रमेश सिंह मरावी, बलवंत सिंह भलावी, अरविंद सिंह टेकाम, गुलाब प्रसाद साहू और प्रकाश परस्ते के नाम शामिल हैं।प्रारंभिक जांच में सरकारी राशि के भुगतान से संबंधित प्रक्रियाओं में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसी का उद्देश्य प्रत्येक आरोपी की भूमिका और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े तथ्यों का पता लगाना है।
IFMIS पोर्टल से एरियर के नाम पर 49.89 लाख के भुगतान का आरोप
जांच के मुताबिक, अप्रैल 2016 से दिसंबर 2025 के बीच कुछ आरोपी CMHO कार्यालय की लेखा शाखा में अलग-अलग पदों पर कार्यरत थे। आरोप है कि IFMIS पोर्टल पर वेतन और एरियर भुगतान से जुड़ी प्रविष्टियों में अनियमितता कर पात्रता से अधिक राशि का भुगतान किया गया।प्रेस नोट के अनुसार, एरियर के नाम पर लगभग 49.89 लाख रुपये का कथित अनियमित भुगतान किया गया। जांच एजेंसी भुगतान की पात्रता और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।
NPA और HRA भत्तों में भी अनियमित भुगतान की आशंका
मामले में नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के भुगतान को लेकर भी सवाल उठे हैं।जांच के अनुसार, बिना वैधानिक आदेश के इन दोनों मदों में करीब 5.89 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किए जाने का आरोप है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित भुगतानों के लिए आवश्यक स्वीकृति और दस्तावेज मौजूद थे या नहीं।
सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी के जरिए 4.78 लाख के भुगतान का आरोप
जांच में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत गुलाब प्रसाद साहू से जुड़ा एक अलग मामला भी सामने आया है।प्रेस नोट के मुताबिक, जुलाई 2024 में IFMIS पोर्टल की ‘After July 2017 Arrear Screen’ का उपयोग कर करीब 4.78 लाख रुपये का भुगतान किया गया। आरोप है कि इस भुगतान के लिए आवश्यक कार्यालयीन आदेश और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे।EOW इस भुगतान की प्रक्रिया, स्वीकृति और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
सरकारी नियमों और दस्तावेजों की अनदेखी का आरोप
EOW की जांच में आरोप लगाया गया है कि कुछ भुगतानों में वैधानिक पात्रता, कार्यालयीन आदेश और आवश्यक दस्तावेजों का समुचित परीक्षण नहीं किया गया। कुछ मामलों में कार्यालयीन रिकॉर्ड की जांच और मैन्युअल गणना के बिना राशि ट्रांसफर किए जाने की बात भी सामने आई है।एजेंसी के अनुसार, इन कथित अनियमितताओं से शासन को आर्थिक क्षति पहुंचने की आशंका है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और BNS की धाराओं में केस दर्ज
EOW ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(सी), 13(1)(ए) और 13(2) के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) और 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया है।अब जांच के दौरान भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड, विभागीय दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी।
फिलहाल, भोपाल EOW मुख्यालय तक पहुंची जानकारी के बाद जांच में सामने आए इस मामले में डिंडोरी स्वास्थ्य विभाग के छह अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। करीब 60.60 लाख रुपये के कथित अनियमित भुगतान से जुड़े मामले की जांच जारी है।