Indore Housing Project: मध्य प्रदेश के इंदौर में अब अपार्टमेंट, बहुमंजिला इमारत और ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं विकसित करना पहले जितना आसान नहीं होगा। नगर निगम ने बिल्डरों, कॉलोनाइजरों और डेवलपर्स के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब शहर की किसी भी नई या पुरानी विकसित कॉलोनी में बहुमंजिला भवन या ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का नक्शा तभी मंजूर होगा, जब संबंधित परियोजना के लिए विकास अनुमति शुल्क (Development Permission Fee) और आश्रय निधि (Shelter Fund) जमा कराकर NOC प्राप्त कर ली जाएगी। नगर निगम के इस फैसले का असर इंदौर में चल रही और प्रस्तावित सैकड़ों आवासीय परियोजनाओं पर पड़ने वाला है। वहीं, नए आदेश के खिलाफ बिल्डर्स ने विरोध भी शुरू कर दिया है।
क्या बदला है नई व्यवस्था में?
अब तक शहर की कई विकसित कॉलोनियों में बिल्डर सीधे नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा से भवन निर्माण का नक्शा मंजूर करा लेते थे। लेकिन नए आदेश के बाद यह प्रक्रिया बदल गई है। अब किसी भी बहुमंजिला आवासीय या व्यावसायिक परियोजना का नक्शा मंजूर कराने से पहले संबंधित डेवलपर को कॉलोनी सेल में विकास अनुमति शुल्क और आश्रय निधि जमा करनी होगी। इसके बाद कॉलोनी सेल द्वारा NOC जारी की जाएगी और तभी बिल्डिंग परमिशन शाखा निर्माण की मंजूरी देगी।
किन परियोजनाओं पर लागू होंगे नए नियम?
नगर निगम के अनुसार यह व्यवस्था निम्न परियोजनाओं पर लागू होगी-
अपार्टमेंट प्रोजेक्ट
बहुमंजिला आवासीय भवन
ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट
मिश्रित (आवासीय एवं व्यावसायिक) परियोजनाएं
यह नियम केवल नई कॉलोनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पहले से विकसित कॉलोनियों और योजनाओं के प्लॉटों पर बनने वाली परियोजनाओं पर भी लागू होगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
नगर निगम का कहना है कि यह निर्णय नगर पालिका निगम अधिनियम-1956, कॉलोनी विकास नियम-2021 और अन्य प्रचलित नियमों के तहत लिया गया है। इसका उद्देश्य-
विकास शुल्क की पारदर्शी वसूली,
नियमानुसार कॉलोनी विकास,
आश्रय निधि का संग्रह,
अवैध निर्माण पर नियंत्रण,
और शहरी विकास को व्यवस्थित बनाना है।
अब कैसे होगी मंजूरी की प्रक्रिया?
नई व्यवस्था के अनुसार प्रक्रिया इस प्रकार होगी-
बिल्डर या कॉलोनाइजर परियोजना का आवेदन करेगा।
मामला पहले नगर निगम के कॉलोनी सेल में जाएगा।
विकास अनुमति शुल्क और आश्रय निधि जमा की जाएगी।
कॉलोनी सेल NOC जारी करेगा।
इसके बाद बिल्डिंग परमिशन शाखा नक्शा मंजूर करेगी।
यानी अब सीधे बिल्डिंग परमिशन शाखा से मंजूरी मिलने की व्यवस्था समाप्त हो गई है।
200 नोटिस जारी, बिल्डर्स ने शुरू किया विरोध
नगर निगम के आदेश के बाद करीब 200 कॉलोनाइजरों और बिल्डरों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। बिल्डर संगठनों का कहना है कि नई व्यवस्था से परियोजनाओं की लागत बढ़ेगी और मंजूरी मिलने में अतिरिक्त समय लगेगा। इसी वजह से इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है।
हाईकोर्ट जाने की आशंका, निगम ने पहले ही उठाया कदम
नगर निगम को आशंका है कि कुछ बिल्डर इस आदेश को अदालत में चुनौती दे सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए निगम प्रशासन ने हाईकोर्ट में कैविएट (Caveat) भी दायर कर दी है, ताकि यदि कोई याचिका दायर होती है तो बिना निगम का पक्ष सुने कोई एकपक्षीय आदेश जारी न हो।
पुरानी मंजूरियों की भी होगी जांच
नगर निगम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नियम लागू होने के बाद जारी सभी भवन अनुज्ञाओं (Building Permissions) की समीक्षा की जाए। यदि किसी परियोजना में विकास अनुमति शुल्क या आश्रय निधि कम जमा की गई है, तो संबंधित कॉलोनाइजर से अंतर की राशि भी वसूली जाएगी।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
इस फैसले का सीधा असर फ्लैट खरीदने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार-
परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।
नियमों का पालन बेहतर तरीके से कराया जा सकेगा।
अवैध निर्माण पर नियंत्रण मिलेगा।
हालांकि अतिरिक्त शुल्क के कारण कुछ परियोजनाओं की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर भविष्य में फ्लैट की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
FAQs
1. इंदौर में नया नियम किसके लिए लागू हुआ है?
अपार्टमेंट, बहुमंजिला भवन और ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के लिए।
2. क्या अब बिना NOC नक्शा मंजूर होगा?
नहीं। विकास अनुमति शुल्क और आश्रय निधि जमा कर NOC मिलने के बाद ही नक्शा मंजूर होगा।
3. यह नियम किन कॉलोनियों पर लागू होगा?
शहर की सभी नई और पुरानी विकसित कॉलोनियों तथा योजनाओं पर।
4. कितने लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं?
नगर निगम द्वारा करीब 200 नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
5. क्या पुरानी परियोजनाओं की भी जांच होगी?
हां। यदि शुल्क कम जमा मिला तो संबंधित डेवलपर से अंतर की राशि वसूली जाएगी।
निष्कर्ष
इंदौर नगर निगम का यह फैसला शहर में भवन निर्माण और कॉलोनी विकास प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियमबद्ध बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब बहुमंजिला परियोजनाओं के लिए NOC अनिवार्य होने से निर्माण प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ेगी। हालांकि बिल्डर्स इस व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं, लेकिन निगम का कहना है कि यह निर्णय कानूनी प्रावधानों के अनुरूप लिया गया है और सभी डेवलपर्स को इसका पालन करना होगा।