श्योपुर: मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापन परियोजना को एक और बड़ा झटका लगा है। भारत में जन्मी 27 माह की मादा चीता KGP-11 की उपचार के दौरान मौत हो गई। घायल अवस्था में मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने उसका रेस्क्यू कर इलाज शुरू कराया था, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसे बचाया नहीं जा सका। इस घटना के बाद कूनो में चीतों की संख्या घटकर 49 और देशभर में कुल संख्या 52 रह गई है।
घायल अवस्था में मिली थी KGP-11, बचाने की कोशिश रही नाकाम
चीता प्रोजेक्ट की ओर से जारी जानकारी के अनुसार 1 जून की सुबह मॉनिटरिंग टीम को रेडियो कॉलर के सिग्नल के जरिए पहाड़गढ़ के घने जंगल में KGP-11 की लोकेशन मिली। मौके पर पहुंची टीम ने देखा कि मादा चीता गंभीर रूप से घायल थी और चलने-फिरने में असमर्थ थी। उसके शरीर पर गहरे जख्म थे। इसके बाद वन विभाग ने तत्काल रेस्क्यू अभियान चलाकर उसे पालपुर स्थित वन्यजीव अस्पताल पहुंचाया। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कई दिनों तक लगातार इलाज किया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हो सका।
आंतरिक रक्तस्राव ने बढ़ाई मुश्किलें
पालपुर वन्यजीव अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान चीता के शरीर में आंतरिक रक्तस्राव की पुष्टि हुई। इलाज के दौरान उसे ड्रिप, एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाएं दी गईं। वन विभाग और पशु चिकित्सकों की टीम लगातार निगरानी करती रही, लेकिन गंभीर चोटों की वजह से उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। अब मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
25 दिनों में पांच भारतीय-जनित चीतों की मौत
KGP-11 की मौत ने चीता परियोजना को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। पिछले 25 दिनों के भीतर भारत में जन्मे पांच चीतों की मौत हो चुकी है। इससे पहले 12 मई को KGP-12 के चार नवजात शावकों की भी मौत हो गई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं ने वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों और परियोजना से जुड़े अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।
पावक और गामिनी की संतान थी KGP-11
वन विभाग के अनुसार KGP-11 नर चीता पावक और मादा चीता गामिनी की संतान थी। वह भारत की धरती पर जन्मी दूसरी पीढ़ी की चीताओं में शामिल थी। भारतीय परिस्थितियों में जन्म लेने और बड़े होने के कारण उसे परियोजना की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता था। उसकी मौत को परियोजना के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है।
खुले जंगल में चीतों के सामने बनी हुई हैं चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि खुले जंगल में दूसरी पीढ़ी के चीतों के लिए जीवित रहना आसान नहीं है। उन्हें शिकार करना, अपना क्षेत्र विकसित करना और दूसरे शिकारी जानवरों से मुकाबला करना सीखना पड़ता है। आशंका जताई जा रही है कि KGP-11 किसी शिकार का पीछा करते हुए तेंदुए के क्षेत्र में पहुंच गई हो, जहां उसे गंभीर चोटें लगीं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
अब देश में बचे 52 चीते
KGP-11 की मौत के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या घटकर 49 रह गई है। इनमें 32 भारतीय-जनित चीते शामिल हैं। वर्तमान में 19 चीते खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। वहीं गांधीसागर क्षेत्र में मौजूद तीन चीतों को मिलाकर देशभर में चीतों की कुल संख्या अब 52 रह गई है। वन विभाग का कहना है कि चीतों के संरक्षण और निगरानी के प्रयास लगातार जारी हैं और घटना की विस्तृत जांच की जा रही है।