भोपाल. मध्य प्रदेश की राजनीति में इस समय कैबिनेट फेरबदल की चर्चा जोरों पर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार में बहुत जल्द बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार संगठन और सरकार दोनों स्तर पर मंत्रियों के प्रदर्शन का गोपनीय आकलन किया गया है। इस रिपोर्ट कार्ड के आधार पर आने वाले दिनों में कुछ महत्वपूर्ण फैसले देखने को मिल सकते हैं। आगामी चुनावों के रोडमैप को ध्यान में रखते हुए नेतृत्व प्रदर्शन पर सख्त रुख अपना रहा है। भोपाल और दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर तेज चर्चाएं चल रही हैं। सरकार की गति बढ़ाने और आंतरिक संतुलन सुधारने के उद्देश्य से यह कवायद की जा रही है।
लाखन पटेल के विभाग में कटौती का कड़ा संदेश
मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव के संकेत तब और मजबूत हो गए जब राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लाखन पटेल के विभागों में अचानक बड़ी कटौती कर दी गई। उनसे पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग का प्रभार वापस ले लिया गया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे अपने पास रख लिया। लाखन पटेल को केवल आनंद विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला परफॉर्मेंस रिव्यू के बाद लिया गया है और बाकी मंत्रियों के लिए भी सीधा संदेश है। प्रदर्शन न करने वाले मंत्रियों पर दबाव बढ़ने का संकेत स्पष्ट है। विभागों में इस तरह की कटौती भविष्य के बड़े बदलाव की शुरुआत मानी जा रही है। नेतृत्व अब कामकाज की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रहा है।
राडार पर पांच-छह मंत्री, कुर्सी पर सस्पेंस
भोपाल और दिल्ली में चल रही चर्चाओं के अनुसार करीब पांच से छह मंत्रियों के कामकाज को लेकर संगठन में असंतोष है। अंदरूनी सूत्रों के हवाले से विजय शाह, दिलीप अहिरवार, प्रतिभा बागरी, राधा सिंह और एदल सिंह कंसाना जैसे मंत्रियों के प्रदर्शन और उनके क्षेत्रों के समीकरणों की समीक्षा की जा रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इनमें से कुछ को संगठन की मुख्यधारा में वापस भेजा जा सकता है। इन मंत्रियों की कुर्सी पर सस्पेंस बना हुआ है। आगामी चुनावों को देखते हुए क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश भी हो रही है। प्रदर्शन और राजनीतिक उपयोगिता दोनों आधार पर आकलन किया जा रहा है। इन नामों को लेकर सियासी हलकों में कयासबाजी तेज हो गई है।
वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में भी संभावित हेरफेर
केवल मंत्रियों को हटाने तक ही बात सीमित नहीं है। प्रशासनिक गति को और तेज करने के लिए प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय जैसे वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों के मौजूदा विभागों की प्रोफाइल में भी फेरबदल संभव है। वरिष्ठ नेताओं के पोर्टफोलियो री-लोकेशन की संभावना जताई जा रही है। इससे सरकार के कामकाज में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। विभागों के पुनर्गठन से दक्षता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का लाभ नए तरीके से लेने की कोशिश की जा रही है। इस तरह के बदलाव से आंतरिक संतुलन भी बेहतर हो सकता है। राजनीतिक जानकार इसे व्यापक फेरबदल का हिस्सा मान रहे हैं।
खाली पदों के लिए महिला नेताओं को मिल सकती है तरजीह
मध्य प्रदेश विधानसभा के नियमों के अनुसार कैबिनेट में अधिकतम पैंतीस सदस्य हो सकते हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री और दो डिप्टी सीएम सहित मंत्रियों की कुल संख्या इकतीस है यानी चार मंत्रिपद अभी खाली हैं। इन सीटों को भरने के लिए क्षेत्रीय और जातीय संतुलन का नया फॉर्मूला तैयार किया जा रहा है। आधी आबादी को सही प्रतिनिधित्व देने और वरिष्ठता का सम्मान करने के लिए रीति पाठक, अर्चना चिटनिस और मालिनी गौड़ जैसी दिग्गज महिला नेताओं के नामों पर गंभीरता से मंथन चल रहा है। इन्हें नए विस्तार में बड़ी कैबिनेट रैंक दी जा सकती है। महिला चेहरों को तरजीह देने से पार्टी की छवि और मजबूत होने की उम्मीद है।
क्षेत्रीय संतुलन और आंतरिक डैमेज कंट्रोल पर जोर
खाली पदों के जरिए बुंडेलखंड, विंध्य और महाकौशल संभाग के उन जिलों को प्रतिनिधित्व देने की कवायद है जो पिछले विस्तार में पीछे छूट गए थे। ग्वालियर-चंबल संभाग में चल रही अंदरूनी खींचतान को शांत करना भी इस फेरबदल का बड़ा फोकस है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों और पुरानी भाजपा के बीच सामंजस्य की कमी को दूर करने के लिए दिल्ली आलाकमान ने बीच का रास्ता तैयार किया है। सिंधिया गुट के मंत्रियों के पोर्टफोलियो को री-एडजस्ट करके पार्टी के भीतर आंतरिक डैमेज कंट्रोल की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। क्षेत्रीय असंतोष दूर करने और पार्टी एकता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन कदमों से सरकार और संगठन दोनों स्तर पर स्थिरता आने की उम्मीद है।