भोपाल। मध्य प्रदेश में परिवार, विवाह और जीवनशैली को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2023- 24 के आंकड़ों के मुताबिक शहरों में बच्चों की आबादी घट रही है, युवा देर से शादी कर रहे हैं और छोटे परिवार का चलन बढ़ रहा है। इसके साथ ही संयुक्त परिवारों के सिमटने से चाचा-चाची, मामा-मामी, बुआ और मौसी जैसे पारंपरिक रिश्तों की मौजूदगी भी कम होती जा रही है।
शहरों में घट रही बच्चों की आबादी
रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के शहरी इलाकों में 15 साल से कम उम्र के बच्चों की आबादी 25.8 फीसदी से घटकर 22.7 फीसदी रह गई है। वहीं, 5 साल से कम उम्र के बच्चों की हिस्सेदारी भी 8.4 फीसदी से घटकर 6.9 फीसदी हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में 5 साल से कम उम्र के बच्चों की आबादी 9 फीसदी दर्ज की गई है।
छोटे परिवार से सिमट रहे रिश्ते
बच्चों की संख्या कम होने और न्यूक्लियर फैमिली का चलन बढ़ने से पारंपरिक पारिवारिक ढांचा भी बदल रहा है। पहले बड़े परिवारों में बच्चों के आसपास चाचा-चाची, मामा-मामी, बुआ और मौसी जैसे रिश्ते सहज रूप से मौजूद रहते थे। अब शहरी परिवारों के छोटे होने से बच्चों की दुनिया सीमित होती जा रही है और कई रिश्ते रोजमर्रा की जिंदगी से दूर होते जा रहे हैं। मध्य प्रदेश में युवाओं के बीच कम उम्र में शादी का चलन घटा है। शहरों में 18 साल से कम उम्र में शादी करने वाली लड़कियों का आंकड़ा 20 फीसदी से घटकर 9 फीसदी रह गया है। वहीं, 21 साल से पहले शादी करने वाले पुरुषों का आंकड़ा भी 25 फीसदी से घटकर 16.2 फीसदी हो गया है।
महिलाओं की प्रजनन दर में भी गिरावट
देर से शादी और छोटे परिवार की प्रवृत्ति का असर प्रजनन दर पर भी दिखाई दे रहा है। शहरी महिलाओं की प्रजनन दर घटकर 1.7 बच्चे प्रति महिला रह गई है। यह बदलाव प्रदेश में परिवार के आकार और जनसांख्यिकीय पैटर्न में आ रहे परिवर्तन को दर्शाता है। जहां बच्चों की हिस्सेदारी कम हुई है, वहीं 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की संख्या बढ़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों की आबादी 11.5 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 11.7 फीसदी दर्ज की गई है। यानी प्रदेश में युवा आबादी की हिस्सेदारी घटने के साथ बुजुर्ग आबादी बढ़ रही है।
मोटापे और लाइफस्टाइल से बीमारियों का बढ़ता असर
रिपोर्ट में जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में भी बढ़ोतरी सामने आई है। शहरी क्षेत्रों में 36.1 फीसदी महिलाएं और 26.9 फीसदी पुरुष मोटापे की समस्या से प्रभावित हैं। वहीं, ब्लड प्रेशर और शुगर की दवाएं नियमित लेने वालों की संख्या भी उल्लेखनीय है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के साथ हिंसा के मामलों में भी चिंता पैदा करने वाले आंकड़े सामने आए हैं। शहरी क्षेत्रों में 2.6 फीसदी और ग्रामीण इलाकों में 2.2 फीसदी महिलाओं ने गर्भावस्था के दौरान हिंसा का सामना किया।
तंबाकू सेवन में कमी,गांवों में बढ़ा शराब का सेवन
प्रदेश में तंबाकू सेवन के मामले में राहत की स्थिति बनी है। पुरुषों में तंबाकू का इस्तेमाल 47.7 फीसदी से घटकर 35.2 फीसदी रह गया है। महिलाओं में यह आंकड़ा 7.4 फीसदी दर्ज किया गया है। शहरी क्षेत्रों में पुरुषों के शराब सेवन का आंकड़ा 18.5 फीसदी से घटकर 13.7 फीसदी हुआ है। इसके उलट ग्रामीण क्षेत्रों में शराब का सेवन करने वाले पुरुषों का आंकड़ा 17 फीसदी से बढ़कर 20.4 फीसदी पहुंच गया है। शहरी क्षेत्रों में पतियों के साथ झगड़े की शिकायतों में भी कमी दर्ज हुई है। यह आंकड़ा 21.4 फीसदी से घटकर 17.7 फीसदी रह गया है।