भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारे जाने के बाद कांग्रेस ने भी अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी ने निर्णय लिया है कि सभी विधायक मतदान से पहले कर्नाटक भेजे जाएंगे और मतदान से ठीक एक दिन पहले भोपाल वापस लौटेंगे।
क्रॉस वोटिंग रोकने की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए कांग्रेस ने यह कदम उठाया है। पार्टी चाहती है कि मतदान तक सभी विधायक पूरी तरह एकजुट रहें। इसी वजह से मंगलवार को सभी विधायकों को भोपाल से कर्नाटक रवाना किया जाएगा।राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा, जबकि मतगणना मतदान समाप्त होने के एक घंटे बाद शुरू होगी।
सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में विधायकों के भोज के दौरान इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में सहमति बनी कि मतदान तक सभी विधायकों को एक ही स्थान पर रखा जाए, ताकि किसी तरह की राजनीतिक संपर्क या तोड़फोड़ की संभावना को रोका जा सके।शुरुआत में विधायकों को तेलंगाना भेजने पर भी विचार किया गया था, लेकिन बाद में कर्नाटक को अंतिम विकल्प के रूप में चुना गया।
कर्नाटक क्यों चुना गया?
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि कर्नाटक में पार्टी की सरकार होने के कारण विधायकों के ठहरने और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध होगी। राजनीतिक रूप से भी इसे अधिक सुरक्षित विकल्प माना गया है।सूत्रों के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी इस दौरान विधायकों के साथ रहेंगे और पूरी चुनावी रणनीति पर नजर बनाए रखेंगे।
तीसरी सीट पर बढ़ा सियासी मुकाबला
राज्यसभा की तीन सीटों में से दो सीटों पर भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन तीसरी सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। भाजपा द्वारा अतिरिक्त उम्मीदवार उतारे जाने के बाद कांग्रेस ने अपनी रणनीति और मजबूत कर दी है, ताकि किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग की संभावना को खत्म किया जा सके।