भोपाल, मध्य प्रदेश | भोपाल में आज 11वां राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर खुशीलाल आयुर्वेदिक महाविद्यालय में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार मौजूद रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद की उपयोगिता और भारतीय जीवनशैली में इसकी भूमिका पर जोर दिया। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आयुर्वेद की शुरुआत घर की रसोई से होती है और इसका महत्व केवल भारत तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि जहां बीमारी है, वहां समाधान भी है और आयुर्वेद एक प्रभावी चिकित्सा पद्धति है।
‘आयुर्वेद जबरदस्त इलाज है’
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने नियमित दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली को आयुर्वेद से जोड़ते हुए कहा कि आयुर्वेद ने दुनिया में अपनी अलग जगह बनाई है। उन्होंने कहा कि वह आयुर्वेद और योग को जीवन में प्राथमिकता देते हैं। मुख्यमंत्री ने भारतीय चिकित्सा परंपरा की वैश्विक पहचान का भी उल्लेख किया।
एक साथ शुरू होंगे 9 आयुर्वेद महाविद्यालय
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश में एक साथ 9 आयुर्वेद महाविद्यालय शुरू किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे आयुर्वेद की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में मदद मिलेगी। सीएम ने आयुर्वेद की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का उदाहरण देते हुए कहा कि स्कॉटलैंड में चरक महाराज की प्रतिमा का अनावरण किया जा रहा है।
आयुर्वेद इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड पर बड़ा ऐलान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंटर्न आयुर्वेद डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की घोषणा भी की। उन्होंने संबंधित विभाग के मंत्री को इस संबंध में निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, फिलहाल आयुर्वेद इंटर्न डॉक्टरों को ₹9,383 प्रति माह स्टाइपेंड मिल रहा है। इसे बढ़ाकर ₹21,500 प्रति माह करने की मांग की जा रही है। सीएम ने कहा कि इस संबंध में जल्द अच्छी खबर मिलने की उम्मीद है।
आयुर्वेद और योग को जीवनशैली से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आयुर्वेद को केवल इलाज तक सीमित न रखते हुए इसे दैनिक जीवनशैली से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने नियमित दिनचर्या, संतुलन और योग के महत्व की बात कही। राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के कार्यक्रम में सरकार की ओर से आयुर्वेद शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था को विस्तार देने के साथ-साथ आयुर्वेदिक चिकित्सा से जुड़े विद्यार्थियों और इंटर्न डॉक्टरों के हितों पर भी चर्चा की गई।